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Question
‘बटोहिया’ गीत से अपनी पसंद की किन्हीं चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
Solution
अपर प्रदेस, देस, सुभग-सुघर बेस
मोरे हिंद जग के निचोड़ रे बटोहिया
सुंदर सुभूमि भैया भारत के भूमि जेही
जन रघुबीर सिर नावे रे बटोहिया।
भावार्थ: कवि श्री रघुवीर नारायण भारत देश के बारे में कहते हैं कि यह देश कई प्रदेशों से मिलकर बना है | यह बहुत सुंदर, तथा सडौल है | हिंद विश्व का निचोड़ (सार) है | इस देश की जमीन बड़ी सुंदर है, बड़ी उपजाऊ है | वे स्वयं इस भूमि के सामने श्रद्धा से अपना सिर झुकाते हैं | वे विश्ववासियों को सलाह देते हैं कि ऐसी सुघर तथा संपन्न धरती की वे यात्रा अवश्य करें | इस प्रकार हम यह स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि, कविता की अंतिम चार पंक्तियों से हमें स्वदेश-प्रेम की प्रेरणा मिलती है |
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सही विकल्प चुनकर लिखिए :
‘बटोहिया’ शब्द से तात्पर्य है - ______
सही विकल्प चुनकर लिखिए :
तीन द्वारों से गर्जना कर रहा है - ______
कृति पूर्ण कीजिए :
कविता (बटोहिया) में आए संत कवियों के नाम :
- ______
- ______
कृति पूर्ण कीजिए :
कविता (बटोहिया) में आई वनस्पतियों के नाम :
- ______
- ______
कविता (बटोहिया) में इस अर्थ में प्रयुक्त शब्द लिखिए :
समुद्र = ______
कविता (बटोहिया) में इस अर्थ में प्रयुक्त शब्द लिखिए :
सुंदर स्त्री = ______
कविता (बटोहिया) में इस अर्थ में प्रयुक्त शब्द लिखिए :
किनारा = ______
कविता (बटोहिया) में इस अर्थ में प्रयुक्त शब्द लिखिए :
हृदय = ______
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा से जाहु-जाहु भैया रे बटोही हिंद देखी आउ |
(1) उपर्युक्त पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए: (2)
- देश - ______
- पर्वत - ______
- पक्षी - ______
- सुगंधी वृक्ष - ______
(2) ‘पर्यटन से होनेवाले लाभ’ इस विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)