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गुट - निरपेक्ष आंदोलन को तीसरी दुनिया के देशों ने तीसरी विकल्प के रूप में समझा। जब शीतलयुद्ध अपने शिखर पर था तब इस विकल्प ने तीसरी दुनिया के देशों के विकास में कैसे मदद पहुंचाई? - Political Science (राजनीति विज्ञान)

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Question

गुट - निरपेक्ष आंदोलन को तीसरी दुनिया के देशों ने तीसरी विकल्प के रूप में समझा। जब शीतलयुद्ध अपने शिखर पर था तब इस विकल्प ने तीसरी दुनिया के देशों के विकास में कैसे मदद पहुंचाई?

Answer in Brief

Solution

जब शीतलयुद्ध अपने शिखर पर था तब गुटनिरपेक्ष आंदोलन के विकल्प ने तीसरी दुनिया के देशों के विकास में काफी मदद पहुँचाई। शीतलयुद्ध के कारण विश्व दो प्रतिद्वंद्वी गुटों में बँट गया था। इसी संदर्भ में गुटनिरपेक्ष ने एशिया, अफ्रीका और लातीनो अमरीका के नव - स्वतंत्र देशो को एक तीसरा विकल्प दिया। यह विकल्प था दोनों महाशक्तियो के गुटों से अलग रहने का। गुटनिरपेक्ष आंदोलन की जड़ में युगोस्लाविया के जोसफ ब्रांज टीटो, भारत के जवाहरलाल नेहरू और मिशन के गमाल अब्दुले नासिर की दोस्ती थी। इन तीनो ने सन 1956 में एक सफल बैठक की। इंडोनेशिया के सुकर्णो और घाना के वामे एन्क्रूमा ने इनका जोरदार समर्थन किया। ये पांच नेता गुटनिरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक बने। प्रथम गुटनिरपेक्ष सम्मेलन सन 1961 में बेलग्रेड में हुआ।

यह सम्मेलन कम - से कम तीन बातो की परिणति था -

  1. इन पांचो संस्थापक देशो के बीच सहयोग
  2. शीतलयुद्ध के प्रसार और इसके बढ़ते हुए दायरे का रोकना,
  3. नव - स्वतंत्र देशों को निर्गुट आंदोलन में शामिल करना। जैसे - जैसे गुटनिरपेक्ष आंदोलन एक लोकप्रिय अंतराष्टीय आंदोलन के रूप में बढ़ता गया वैसे - वैसे इसमें विभिन्न राजनितिक प्रणाली और अलग - अलग हितों के देश शामिल होते गए। इससे गुटनिरपेक्ष आंदोलन के मूल स्वरूप में बदलाव आया। गुटनिरपेक्ष आंदोलन महाशक्तियो के गुटों में शामिल न होने का आंदोलन है हमशक्तियो के गुटों से अलग रहने की इस निति का आशय यह नहीं है की इस आंदोलन से संबंधित देश द्वारा अपने को अंतर्राष्ट्रीय मामलो में अलग - धलग रखा जाता है या तटस्थता का पालन किया जाता है
    गुटनिरपेक्ष का अर्थ तटस्थता का धर्म निभाना भी नहीं है। तटस्थता का अर्थ होता है मुख्यतः युद्ध में शामिल न होने की निति का पालन करना। तटस्थता की निति का पालन करने वाले देश के लिए यह जरुरी नहीं की वह युद्ध को समाप्त करने में मदद करे। ऐसे देश युद्ध में संलग्न नहीं होते और न ही युद्ध में भी हुए है। इस देशो ने दूसरे देशों के बीच युद्ध को होने से टालने के लिए काम किया है और हो रहे युद्ध के अंत के लिए प्रयास किये हैं।
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शीतयुद्ध के दायरे
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Chapter 1: शीतयुद्ध का दौर - प्रश्नावली [Page 16]

APPEARS IN

NCERT Political Science [Hindi] Class 12
Chapter 1 शीतयुद्ध का दौर
प्रश्नावली | Q 9. | Page 16
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