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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 7th Standard

हजारी प्रसाद द्विवेदी लिखित 'कबीर ग्रंथावली' से दस दोहे ढूँढकर अर्थसहित लिखो। - Marathi (Second Language) [मराठी (द्वितीय भाषा)]

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Question

हजारी प्रसाद द्विवेदी लिखित 'कबीर ग्रंथावली' से दस दोहे ढूँढकर अर्थसहित लिखो।

Very Long Answer

Solution

10 प्रसिद्ध दोहे उनके सरल अर्थ:

  1. बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥ → अर्थ: जब मैंने दूसरों में बुराई खोजी, तो कोई बुरा नहीं मिला। लेकिन जब मैंने अपने मन को टटोला, तो पाया कि सबसे बुरा तो मैं ही हूँ।
  2. पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥ → अर्थ: किताबें पढ़ते-पढ़ते लोग मर गए, पर सच्चे ज्ञानी नहीं बन पाए। जो प्रेम का ढाई अक्षर पढ़ ले, वही सच्चा ज्ञानी है।
  3. माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर। कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥ → अर्थ: जीवन भर माला फेरने से कुछ नहीं होता, अगर मन नहीं बदला। सच्चा जप तो मन के विकारों को दूर करना है।
  4. साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। सार-सार को गहि रहे, थोथा देई उड़ाय॥ → अर्थ:  सच्चा साधु वही है जो अच्छे गुणों को अपनाए और बुराइयों को त्याग दे, जैसे सूप दानों को बचाता है और भूसा उड़ा देता है।
  5. कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर। ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर॥ → अर्थ: कबीर दुनिया से न द्वेष करते हैं, न अत्यधिक लगाव रखते हैं। वे सबके लिए शुभकामना करते हैं। 
  6. चलती चाकी देख के, दिया कबीरा रोय। दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोय॥ → अर्थ: जीवन की दो विपत्तियाँ मनुष्य को पीसती हैं। जैसे चक्की में कोई दाना साबुत नहीं बचता, वैसे ही संसार में कोई दुखों से अछूता नहीं रहता।
  7. निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय॥ → अर्थ: जो हमारी बुराइयाँ बताता है, उसे पास रखना चाहिए क्योंकि वह बिना किसी साधन के हमारा स्वभाव सुधारता है। 
  8. जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान। मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥ → अर्थ: किसी संत की जाति नहीं, उसका ज्ञान देखना चाहिए। जैसे तलवार का मूल्य होता है, म्यान का नहीं।
  9. धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय। → माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय॥ → अर्थ: हर कार्य का फल समय आने पर ही मिलता है। जल्दी करने से कुछ नहीं होता, धैर्य जरूरी है।
  10. कबीरा जब हम पैदा हुए, जग हँसे हम रोय। ऐसी करनी कर चलो, हम हँसे जग रोय॥ → अर्थ: जब हमारा जन्म हुआ, सब हँसे और हम रोए। ऐसा जीवन जियो कि जब हम जाएँ, तो हम मुस्कराएँ और सब रोएँ।
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Chapter 1.1: पद - पाठ्य प्रश्न [Page 3]

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Balbharati Integrated 7 Standard Part 4 [Hindi Medium] Maharashtra State Board
Chapter 1.1 पद
पाठ्य प्रश्न | Q १०. | Page 3
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