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हम अपने हृदय को पेशीजनक (मायोजेनिक) क्यों कहते हैं? - Biology (जीव विज्ञान)

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Question

हम अपने हृदय को पेशीजनक (मायोजेनिक) क्यों कहते हैं?

Answer in Brief

Solution

  1. हृदय की भित्ति हृदपेशियों (cardiac muscles) से बनी होती है। हृद पेशियाँ रचना में रेखित पेशियों के समान होती हैं, लेकिन कार्य में अरेखित पेशियों के समान अनैच्छिक होती हैं।
  2. हृदय पेशियाँ मनुष्य की इच्छा से स्वतन्त्र, स्वयं बिना थके, बिना रुके, एक निश्चित दर (मनुष्य में 72 बार प्रति मिनट) और एक निश्चित लय (rhythm) से जीवनभर संकुचित और शिथिल होती रहती हैं। S-A node से संकुचन प्रेरणा स्व:उत्प्रेरण द्वारा उत्पन्न होकर A-Vnode तथा हिस के समूह (bundle of His) से होकर पुरकिन्जे तन्तुओं द्वारा अलिन्द और निलयों में फैलती है।
  3. हृदय पेशियों में संकुचन के लिए तन्त्रिकीय प्रेरणा की आवश्यकता नहीं होती। पेशियों में संकुचन पेशियों के कारण होते हैं अर्थात् संकुचन पेशीजनक (myogenic) होते हैं। यदि हृदय में जाने वाली तन्त्रिकाओं को काट दें तो भी हृदये अपनी निश्चित दर से धड़कता रहता है।
  4. तन्त्रिकीय प्रेरणाएँ हृदय की गति की दर को प्रभावित करती हैं। हृदय पेशियों के तन्तुओं में ऊर्जा उत्पादन हेतु प्रचुर मात्रा में माइटोकॉण्ड्रिया पाए जाते हैं।
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परिसंचरण पथ - मानव परिसंचरण तंत्र
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Chapter 15: शरीर द्रव तथा परिसंचरण - अभ्यास [Page 204]

APPEARS IN

NCERT Biology [Hindi] Class 11
Chapter 15 शरीर द्रव तथा परिसंचरण
अभ्यास | Q 9. | Page 204
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