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जैहउँ अवध कवन मुहुँ लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।। बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं।। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।। - Hindi (Core)

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Question

जैहउँ अवध कवन मुहुँ लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।
बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं।। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।।
भाई के शोक में डूबे राम के इस प्रलाप-वचन में स्त्री के प्रति कैसा सामाजिक दृष्टिकोण संभावित है?

Answer in Brief

Solution

प्रस्तुत दृष्टिकोण से पता चलता है कि उस समय स्त्रियों के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण अच्छा नहीं था। उस समय बहु विवाह प्रचलित थे। राजा तो अनेक शादियाँ कर सकता था। अतः स्त्री के प्रति ऐसा दृष्टिकोण होना स्वभाविक ही होगा। अतः एक स्त्री (पत्नी) के लिए भाई को खोना बुरी माना जाता होगा। इस पंक्ति से स्पष्ट होता है कि स्त्री चली जाए उससे पति को कोई खास दुख नहीं होता है। पुरुष दोबारा विवाह कर सकता है परन्तु खून के संबंधों को चोट नहीं आनी चाहिए। खून के संबंध विवाह संबंधों से बड़े माने जाते थे। इस श्लोक से स्पष्ट होता है कि समाज में स्त्री के प्रति संकीर्ण और उपेक्षापूर्ण दृष्टिकोण विद्यमान था। उस समय एक विवाहित स्त्री के लिए मयाके तथा ससुराल दोनों ही अपने नहीं थे। 
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लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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Chapter 8: तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप) - अभ्यास [Page 51]

APPEARS IN

NCERT Hindi - Aaroh Class 12
Chapter 8 तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप)
अभ्यास | Q 8. | Page 51

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