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‘जीवन निरंतर चलते रहने का नाम है’, इस विचार की सार्थकता स्पष्ट कीजिए । - Hindi

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Question

‘जीवन निरंतर चलते रहने का नाम है’, इस विचार की सार्थकता स्पष्ट कीजिए ।

Short Note

Solution

जीवन का उद्देश्य निरंतर आगे-ही-आगे बढ़ते रहना है। जीवन में ठहराव आने को मृत्यु की संज्ञा दी जाती है। अनेक महापुरुषों ने अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए जीवन भर संघर्ष किया है और उनका नाम अमर हो गया है। जीवन का मार्ग आसान नहीं है। उस पर पग-पग पर कठिनाइयाँ आती रहती हैं। इन कठिनाइयों से उसे जूझना पड़ता है। उसमें हार भी होती है और जीत भी होती है। असफलताओं से मनुष्य को घबराना नहीं चाहिए। बल्कि उनका दृढ़तापूर्वक सामना करके उसमें से अपना मार्ग प्रशस्त करना और निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। एक दिन मंजिल अवश्य मिलेगी। जीवन संघर्ष कभी न खत्म होने वाला संग्राम है। इसका सामना करने का एकमात्र मार्ग है निरंतर चलते रहना और हर स्थिति में संघर्ष जारी रखना।

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सच हम नहीं; सच तुम नहीं
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Chapter 3: सच हम नहीं; सच तुम नहीं - अभिव्यक्त [Page 14]

APPEARS IN

Balbharati Hindi - Yuvakbharati 12 Standard HSC Maharashtra State Board
Chapter 3 सच हम नहीं; सच तुम नहीं
अभिव्यक्त | Q 1 | Page 14

RELATED QUESTIONS

कविता की पंक्ति पूर्ण कीजिए :

  1. बेकार है मुस्कान से ढकना, ____________
  2. आदर्श नहीं हो सकती, ____________
  3. अपने हृदय का सत्य, ____________
  4. अपने नयन का नीर, ____________

लिखिए :

जीवन यही है - ____________


लिखिए :

मिलना वही है - ____________


‘संघर्ष करने वाला ही जीवन का लक्ष्य प्राप्त करता है’, इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए ।


‘नयी कविता’ के अन्य कवियों के नाम - ......


जानकारी दीजिए :

कवि डॉ. जगदीश गुप्त की प्रमुख साहित्यिक कृतियों के नाम -  ____________


निम्नलिखित पठित काव्यांश को पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

 

हमने रचा, आओ ! हमीं अब तोड़ दें इस प्यार को।
यह क्या मिलन, मिलना वही, जो मोड़ दे मँझधार को।
जो साथ फूलों के चले,
जो ढाल पाते ही ढले,
यह जिंदगी क्या जिंदगी जो सिर्फ पानी-सी बही।
सच हम नहीं, सच तुम नहीं।

अपने हृदय का सत्य, अपने-आप हमको खोजना।
अपने नयन का नीर, अपने-आप हमको पोंछना।
आकाश सुख देगा नहीं
धरती पसीजी है कहीं !
हर एक राही को भटककर ही दिशा मिलती रही।
सच हम नहीं, सच तुम नहीं।

बेकार है मुस्कान से ढकना हृदय की खिन्नता।
आदर्श हो सकती नहीं, तन और मन की भिन्नता।
जब तक बँधी है चेतना
जब तक प्रणय दुख से घना
तब तक न मानूँगा कभी, इस राह को ही मैं सही।
सच हम नहीं, सच तुम नहीं ।

- (नाव के पाँव कविता संग्रह से')

1. कविता की पंक्तियाँ पूर्ण कौजिए:   (2)

  1. अपने हृदय का सत्य, ______
  2. यह जिंदगी कया जिंदगी ______
  3. आदर्श हो सकती नहीं, ______
  4. तब तक न मानूँगा कभी, ______

2. प्रत्येक शब्द के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।  (2)

  1. नीर - ______
  2. फूल - ______
  3. हृदय - ______
  4. नयन - ______

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए।  (2)

“जीवन निरंतर चलते रहने का नाम है।” इस विचार पर अपना मत स्पष्ट कीजिए।


कवि डॉक्टर जगदीश गुप्त की प्रमुख साहित्यिक कृतियों के नाम लिखिए।


निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

अपने हृदय का सत्य, अपने-आप हमको खोजना।
अपने नयन का नीर, अपने-आप हमको पोंछना।
आकाश सुख देगा नहीं
धरती पसीजी है कहीं!
हर एक राही को भटककर ही दिशा मिलती रही।
सच हम नहीं, सच तुम नहीं।

बेकार है मुस्कान से ढकना हृदय की खिन्नता।
आदर्श हो सकती नहीं, तन और मन की भिन्नता।
जब तक बँधी है चेतना
जब तक प्रणय दुख से घना
तब तक न मानूँगा कभी, इस राह को ही मैं सही।
सच हम नहीं, सच तुम नहीं।

(१) उत्तर लिखिए: (२)

  1. हमें हृदय की इस बात को खोजना है - ______
  2. हर एक राही को भटककर मिलती है - ______
  3. इसे मुस्कान से ढकना बेकार है - ______
  4. यह आदर्श नहीं हो सकती है - ______

(२) निम्नलिखित शब्दों के प्रत्यय निकालकर पद्यांश में आए हुए मूल शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (२)

  1. सत्यता - ______
  2. सुखी - ______
  3. राही - ______
  4. मुस्कुराहट - ______

(३) ‘संघर्ष करने वाला व्यक्ति ही जीवन में सफल होता है’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)


निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 'सच हम नहीं सच तुम नहीं' कविता का रसास्वादन कीजिए:

  1. रचनाकार का नाम      [1]
  2. पसंद की पंक्तियाँ       [1]
  3. पसंद आने के कारण        [2]
  4. कविता की केंद्रीय कल्पना      [2]

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