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जहाँ पर दाना रहते हैं, वहीं नादान भी होते हैं- कवि ने ऐसा क्यों कहा होगा? - Hindi (Core)

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Question

जहाँ पर दाना रहते हैं, वहीं नादान भी होते हैं- कवि ने ऐसा क्यों कहा होगा?

Answer in Brief

Solution

कवि ने ऐसा संसार की स्थिति को दर्शाने के लिए कहा होगा। उसके अनुसार यह संसार उसे हैरान परेशान कर देता है। क्योंकि यहाँ पर दो विरोधी प्रवृत्ति के लोग एक साथ रहते हैं। कवि कहता है कि इस संसार में जहाँ चतुर लोग हैं, वही यहाँ पर सीधे तथा मूर्ख लोगों का अस्तित्व भी है। मूर्ख लोगों को ही उल्लू बनाकर यहाँ चतुर लोग अपना काम निकालते हैं। अर्थात यदि मूर्ख न हों, तो चतुर लोगों का अस्तित्व संभव नहीं है। अतः इस संसार में हर प्रकार के लोग साथ रहते हैं। इनमें कुछ अच्छे तथा कुछ बुरे हैं। आपस में विरोधी स्वभाव होने के बाद भी ये साथ ही रहते हैं।
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आत्मपरिचय
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Chapter 1: हरिवंश राय बच्चन (आत्मपरिचय, एक गीत) - अभ्यास [Page 8]

APPEARS IN

NCERT Hindi - Aaroh Class 12
Chapter 1 हरिवंश राय बच्चन (आत्मपरिचय, एक गीत)
अभ्यास | Q 2. | Page 8

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कविता एक ओर जग-जीवन का भार लिए घूमने की बात करती है और दूसरी ओर मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ- विपरीत से लगते इन कथनों का क्या आशय है?

मैं और, और जग और कहाँ का नाता- पंक्ति में और शब्द की विशेषता बताइए।


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 जयशंकर प्रसाद की आत्मकथ्य कविता की कुछ पंक्तियाँ दी जा रही है। क्या पाठ में दी गई आत्मपरिचय कविता से इस कविता का आपको कोई संबंध दिखाई देता है? चर्चा करें।

आत्मकथ्य
मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,
उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की।
सीवन की उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कथा की?
छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ?
क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ?
सुनकर क्या तुम भला करोगे मेरी भोली आत्म-कथा?
अभी समय भी नहीं, थकी सोई है मोरी मौन व्यथा।


‘आत्मपरिचय’ कविता में कवि ने अपने जीवन में किन परस्पर विरोधी बातों का सामंजस्य बिठाने की बात की है?


निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए -

मैं निज उर के उद्गार लिए फिरता हूँ,
मैं निज उर के उपहार लिए फिरता हूँ,
है यह अपूर्ण संसार न मुझको भाता,
मैं स्वप्नों का संसार लिए फिरता हूँ।

मैं जला हृदय में अग्नि, दहा करता हूँ,
सुख-दुख दोनों में मग्न रहा करता हूँ,
जग भव-सागर तरने की नाव बनाए,
मैं भव-मौजों पर मस्त बहा करता हूँ।

  1. कवि के स्वप्नों का संसार है?   1
    1. यथार्थ
    2. आदर्श
    3. स्वप्निल
    4. सुखी
  2. निम्नलिखित कथनों पर विचार करते हुए पद्यांश के अनुसार सही कथन को चयनित कर लिखिए।  1
    1. स्मृतियों की नाव में कवि एक यात्री है।
    2. कविता में अग्नि परिवर्तन की इच्छा का प्रतीक है।
    3.  यथार्थ संसार से कवि को कोई सरोकार नहीं है।
    4. सुख-दुख का असर कवि पर होता है।
  3. काव्यांश में 'उर' से तात्पर्य है?  1
    1. हृदय
    2. इच्छा
    3. स्मृति
    4. आवेश
  4. निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।  1
    कथन (A): यथार्थ को स्वीकार नहीं करने से कवि के स्वप्न अधूरे रह गए हैं।
    कारण (R): कल्पना और वास्तविकता में सामंजस्य की कमी होने से कवि को संसार अधूरा महसूस होता है।
    1. कथन (A) सही है, कारण (R) गलत है।
    2. कथन (A) सही नहीं है, कारण (R) सही है।
    3. कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं, किंतु कारण (R) उसकी सही व्याख्या नहीं करता।
    4. कथन (A) सही है तथा कारण (R) दोनों सही हैं, कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
  5. भव-मौजों में मस्त बहने से तात्पर्य क्या है?  1
    1. सांसारिक सुख रूपी लहरें
    2. मौज-मस्ती करना
    3. स्वप्न में उपजी सुख-दुख की लहरें
    4. नाव जैसी बहने वाली भावुकता

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