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‘जितना ही दौड़ा तू उतना ही भरमाया’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है? - Hindi Course - A

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Question

‘जितना ही दौड़ा तू उतना ही भरमाया’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

One Line Answer

Solution

‘जितना ही दौड़ा तू उतना ही भरमाया’ के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि यश, वैभव और मान-सम्मान, प्रतिष्ठा जैसा कुछ नहीं है। ये भौतिक वस्तुएँ छलावा मात्र हैं। इनको पाने के लिए व्यक्ति जितना ही भागता है उतना ही भ्रमित होता है क्योंकि उसके हाथ कुछ नहीं लगता है। इन भौतिक वस्तुओं को पाने के लिए भ्रमित रहता है।

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छाया मत छूना
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Chapter 7: गिरिजाकुमार माथुर - छाया मत छूना - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

NCERT Hindi - Kshitij Part 2 Class 10
Chapter 7 गिरिजाकुमार माथुर - छाया मत छूना
अतिरिक्त प्रश्न | Q 4

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भाव स्पष्ट कीजिए -

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'छाया' शब्द यहाँ किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है? कवि ने उसे छूने के लिए मना क्यों किया है?


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‘भूली-सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण’ से कवि का क्या आशय है?


‘हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है’ पंक्ति में कवि हमें किस यथार्थ एवं सत्य से अवगत कराना चाहता है?


कविता में यथार्थ स्वीकारने की बात क्यों कही गई है?


प्रभुता की कामना को मृगतृष्णा क्यों कहा गया है?


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अथवा
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