Advertisements
Advertisements
Question
कॉपर मेट को सिलिका की परत चढ़े हुए परिवर्तकों में क्यों रखा जाता है?
Solution
सिलिका युक्त परिवर्तक (बेसेमर परिवर्तक) में मेट में उपस्थित शेष FeS को FeO में ऑक्सीकृत करने के लिए रखा जाता है जो सिलिका के साथ संयोग कर संगलित धातुमल बनाता है।
\[\ce{2FeS + 3O2 -> 2FeO + 2SO2}\]
\[\ce{FeO + SiO2 -> \underset{{धातुमल}}{FeSiO3}}\]
जब संपूर्ण लोहे को धातुमल के रूप में पृथक् कर लिया जाता है, तब कुछ Cu2S ऑक्सीकरण के फलस्वरूप Cu2O बनाता है जो अधिक Cu2S के साथ अभिक्रिया करके कॉपर धातु बनाता है।
\[\ce{2Cu2S + 3O2 -> 2Cu2O + 2SO2 ^}\]
\[\ce{2Cu2O + Cu2S -> 6Cu ↓ SO2 ^}\]
अत: कॉपर मेट को सिलिका की परत चढ़े हुए परिवर्तक में मेट में उपस्थित FeS को FeSiO3 धातुमल के रूप में हटाने के लिए भी रखा जाता है।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
उदाहरण देते हुए भर्जन व निस्तापन में अंतर बताइए।
Cr2O3 के विरचन के लिए ΔfGΘ का मान – 540 kJ mol−1 है तथा Al2O3 के लिए – 827 kJ mol−1 है। क्या Cr2O3 का अपचयन Al से संभव है?
C व CO में से ZnO के लिए कौन-सा अपचायक अच्छा है?
किसी विशेष स्थिति में अपचायक का चयन ऊष्मागतिकी कारकों पर आधारित है। आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं? अपने मत के समर्थन में दो उदाहरण दीजिए।