Advertisements
Advertisements
Question
कुब्जा और नीलकंठ के स्वभाव में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Solution
कुब्जा के स्वभाव में रूखापन था। वह किसी को भी नीलकंठ के पास नहीं आने देना चाहती थी। यहाँ तक कि उसने राधा को भी उससे अलग कर दिया। इसके विपरीत नीलकंठ का स्वभाव सरल था उसका सभी के साथ मेल-जोल था। वह सभी जीव-जंतुओं में अपनी एक विशेष पहचान रखता था। राधा के साथ उसका आत्मीय संबंध था, जब कुब्जा ने राधा से दूर किया तो उसने अपने प्राण ही त्याग दिए।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
पक्षी को मैदा से भरी सोने की कटोरी से कड़वी निबौरी क्यों अच्छी लगती है?
लेखक की कमजोरी क्या थी?
क्वार के दिनों में सिवान (नाले) के पानी में क्या-क्या बहकर आता था?
दादी माँ ने यह क्यों कहा कि लड़के और ब्रह्मा को मंन एक-सा होता है?
पिता जी और लेखक के बड़े भाई किशन मन मारे क्यों बैठे थे?
नगरभर में क्या समाचार फैल गया था? लोग उसके बारे में क्या बातें कर रहे थे?
मिठाईवाले के मन की व्यथा क्या थी?
ग्राहकों का व्यवहार कैसा होता है? कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
लाल कणों का जीवन काल कितना होता है?
टाँके कब लगाए जाते हैं? क्यों?
'उसके पिता एक सुंदर-सा खिलौना बनाने में लगे हैं।'
इस वाक्य में 'सुंदर-सा' लगाकर वाक्य बनाया गया है।
तुम भी साधारण, बड़ा, छोटा, लंबा, गोल, चौकोर और त्रिकोण शब्द में सा, से या सी का प्रयोग कर वाक्य बनाओ।
काबुलीवाला हमेशा पैसे क्यों लौटा देता था?
रहमत ने एक धोखेबाज़ आदमी को छुरा मार दिया। क्या अगर तुम रहमत की जगह होते तो क्या करते?
झलकारीबाई का क्या हुआ?
नाटक में बच्ची को बचाने वाले पात्रों में एक ही सजीव पात्र है। उसकी कौन-कौन सी बातें आपको मज़ेदार लगीं? लिखिए।
बहुविकल्पी प्रश्न
“फ़ीस के पैसे क्या फोकट में आते हैं?’-को भाव क्या है?
मिठाईवाले के परिवार के साथ क्या हुआ होगा? सोचिए और इस आधर पर एक और कहानी बनाइए?
आप खानपान में आए बदलावों को किस रूप में लेते हैं?
कुब्जा के जीवन का अंत कैसे हुआ?
अपने प्राणों के बलिदान का अवसर आ गया है। इस वाक्य में "प्राणों का बलिदान देना" मुहावरे का प्रयोग हुआ है।
नीचे मुहावरा दिया गया हैं। इसका अपने वाक्य में प्रयोग करो।
टूट पड़ना