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Question
कविता (चिंता) की अंतिम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
प्रकृति रही दुर्जेय, पराजित हम सब थे भूले मद में,
भोले थे, हॉं तिरते केवल सब विलासिता के नद में।
वे सब डूबे, डूबा उनका विभव, बन गया पारावर
उमड़ रहा था देव सुखों पर दुख जलधि का नाद अपार’’
Solution
कवि प्रसाद के अनुसार प्रकृति तो अजेय रही है | देवता गण जो नशे में चूर थे, उन्हींको पराजय झेलनी पड़ी है | प्रलय के पूर्व देवता गण भोले बने हुए थे, तथा सुख और विलासिता की नदी में अवगाहन करते थे | विलासिता पूर्ण जीवन जीने वाले लोग तथा विलासी उपकरण सभी प्रलय के जल में डूब गए | देवताओं के सुखी जीवन पर दुख का सागर उमड़ पड़ा था |
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संजाल पूर्ण कीजिए :
लिखिए :
लिखिए :
जोड़ियाँ मिलाइए :
अ | उत्तर | आ |
जलधि | ______ | दुख |
पुतले | ______ | उपेक्षाएँ |
रेखाएँ | ______ | नाद |
यौवन | ______ | चमकीले |
कविता (चिंता) में इन अर्थ में आए शब्द ढूँढ़िए :
वर्षा - ______
कविता (चिंता) में इन अर्थ में आए शब्द ढूँढ़िए :
अत्यंत गुप्त - ______
कविता (चिंता) में इन अर्थ में आए शब्द ढूँढ़िए :
पृथ्वी/नदी - ______
कविता (चिंता) में इन अर्थ में आए शब्द ढूँढ़िए :
वायु - ______
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर "चिंता" कविता का पद्य विश्लेषण कीजिए:
- रचनाकार का नाम
- रचना की विधा
- पसंदीदा पंक्ति
- पसंद होने का कारण
- रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा