English
Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 7th Standard

मैंने समझा आलस का सुख पाठ से - Marathi (Second Language) [मराठी (द्वितीय भाषा)]

Advertisements
Advertisements

Question

मैंने समझा आलस का सुख पाठ से 

Very Long Answer

Solution

इस पाठ में आलसी लोगों की मानसिकता, समाज में आलस्य का प्रभाव, और आलसी लोगों की जीवनशैली को व्यंग्यात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

  • प्राचीन काल से परिश्रम को महत्व दिया गया है, लेकिन आलसी लोग परिश्रम से बचने के लिए अलग-अलग तर्क देते हैं।
  • आलसी लोगों को सामाजिक रूप से निकम्मा माना जाता है, लेकिन वे खुद को सबसे चतुर समझते हैं।
  • आज की भौतिकतावादी दुनिया में आलसी लोग अपने आलस्य को बचाने के लिए नए तरीके अपनाते हैं।
  • लेखक ने व्यंग्य के माध्यम से आलसी लोगों की आदतों और उनके तर्कों को उजागर किया है।
  • वे किसी भी चीज़ को जल्दी स्वीकार नहीं करते, दूसरों की सफलता को ईर्ष्या से देखते हैं, और हमेशा आराम की तलाश में रहते हैं।
  • आलस्य से व्यक्ति की सफलता में बाधा आती है, और वह जीवन में कुछ बड़ा हासिल नहीं कर पाता।
shaalaa.com
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 1.5: आलस का सुख - पाठ्य प्रश्न [Page 18]

APPEARS IN

Balbharati Integrated 7 Standard Part 3 [Hindi Medium] Maharashtra State Board
Chapter 1.5 आलस का सुख
पाठ्य प्रश्न | Q ८. | Page 18
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×