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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 7th Standard

विकारी शब्‍द और उनके भेद संज्ञा - जातिवाचक संज्ञा व्यक्‍तिवाचक संज्ञा भाववाचक संज्ञा द्रव्यवाचक संज्ञा समूहवाचक संज्ञा सर्वनाम -  पुरुषवाचक सर्वनाम  निश्चयवाचक सर्वनाम  अनिश्चयवाचक - Marathi (Second Language) [मराठी (द्वितीय भाषा)]

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Questions

विकारी शब्दों के भेदों पर चर्चा करें। 

Grammar
Long Answer

Solution

  1. संज्ञा - किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव के नाम को संज्ञा कहते है।
    जैसे - सुंदरता, दिल्ली, मोहन,कलम आदि।
    1. जातिवाचक संज्ञा - जिस संज्ञा से किसी खास जाति अथवा वर्ग का बोध होता है, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।
      जैसे- शहर, पेड़, पक्षी, पुरुष, कुत्ता आदि।
      उदाहरण:
      1. शेर जंगल का राजा होता है।
      2. मानव सबसे अधिक बुद्धिमान प्राणी है। 
    2. व्यक्‍तिवाचक संज्ञा - जिस संज्ञा से किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध होता है, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं।
      जैसे- लखनऊ, सरिता गोदावरी, आदि।
      उदाहरण:
      1. रमेश और सुरेश प्रिय मित्र है
      2. गंगा भारत की सबसे पवित्र नदी है।
    3. भाववाचक संज्ञा - जिस संज्ञा से किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा स्थान के गुण, स्वभाव, धर्म का बोध होता हैं, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं।
      जैसे - दुश्मनी, वीरता, बुढ़ापा, स्वाद
      उदाहरण:
      1. तुम मुस्कुराते हुए बहुत अच्छी लगती हो।
      2. क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।
    4. द्रव्यवाचक संज्ञा - वे संज्ञा शब्द जो वस्तु के द्रव्य का नाम बताते हैं, द्रव्यवाचक संज्ञा कहलाते हैं।
      जैसे - ताँबा, लोहां, सोना, पानी आदि।
      उदाहरण:
      1. गाड़ी में पेट्रोल ख़त्म हो गया है।
      2. चाय में अदरक डालने से चाय का स्वाद बढ़ जाता है। 
    5. समूहवाचक संज्ञा - वे संज्ञा शब्द जो समूह, समुदाय का बोध कराते हैं, उन्हेंसमूहवाचक संज्ञा कहते हैं।
      जैसे- गुच्छा, संस्था, सेना, भीड़, कक्षा आदि।
      उदाहरण:
      1. मेरे गांव में मेला लगा है।
      2. मेरी कक्षा के बच्चे घूमने जा रहे हैं।
  2. सर्वनाम - संज्ञा के स्थान पर प्रयोग में लाए जाने वाले विकारी शब्दों को सर्वनाम कहते हैं।
    जैसे - मैं, तुम, वह, कौन आदि।
    1. पुरुषवाचक सर्वनाम - जिस व्यक्ति के विषय में बोला या लिखा जाता हैं उसके बदले में आने वाले सर्वनाम को पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं।
      पुरुषवाचक सर्वनाम के तीन प्रकार हैं -
      1. प्रथम पुरुषवाचक: (वक्ता) मैं और हम का प्रयोग होता है।
        उदाहरण: मैं घर जा रहा हूँ।
      2. मध्यम पुरुषवाचक: (वक्ता) तू, तुम या आप का प्रयोग होता है। उदाहरण: तुम आज घर आना।
      3. अन्य पुरुषवाचक: दो व्यक्ति जब किसी तीसरे व्यक्ति के विषय में बात करते हों।
        उदाहरण: वह भी घर पर आएगा।
    2. निश्चयवाचक सर्वनाम - जिसे सर्वनाम से किसी निश्चित व्यक्ति अथवा वस्तुका ज्ञान होता है, उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।
      उदाहरण:
      1. वह खाना खा रहा है।
      2. यह भारत का नक्शा है।
    3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम - जिस सर्वनाम से किसी व्यक्ति अथवा वस्तु का निश्चित ज्ञान न हो, उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।
      उदाहरण:
      1. गवाह ने किसी को इधर-उधर छिपते हुए देखा।
      2. अधिकांश बच्चे चले गए, लेकिन उनमें से कई अभी भी यहां हैं।
    4. प्रश्नवाचक सर्वनाम - जिस सर्वनाम शब्द से किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान के विषय में प्रश्न का बोध होता है, उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं।
      उदाहरण:
      1. तुमने मुझे किस लिए बुलाया?
      2. तुम किस कारण से रो रहे हो?
    5. संबंधवाचक सर्वनाम - संबंधवाचक सर्वनाम वे हैं, जो एक शब्द का दूसरे से संबंध जोड़ते हैं।
      उदाहरण:
      1. वो बात जगह-जगह फैल गई।
      2. जिसकी लाठी उसकी भैंस।
  3. विशेषण - जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं।
    उदाहरण:
    राधा सुंदर है।
    मोहन अच्छा गाता है।
    1. गुणवाचक विशेषण - वे शब्द जो किसी संज्ञा या सर्वनाम के गुण, दोष, रंग, आकार, दशा आदि का ज्ञान करातें हैं, उन्हें गुणवाचक विशेषण कहते हैं।
      उदाहरण:
      1. वह बहुत डरपोक है।
      2. लोमड़ी बहुत लालची जानवर है।
    2. परिमाणवाचक विशेषण - जिन शब्दों से संज्ञा या सर्वनाम के माप-तौल या मात्रा का ज्ञान होता है, उन्हें परिमाणवाचयक विशेषण कहते हैं। 
      1. निश्चित परिमाणवाचक विशेषण - जिस शब्द से निश्चित माप-तौल का बोध हो, उसे निशिचत परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं।
        उदाहरण:
        1. दो किलो अनाज दे दो।
        2. मेरे लिए एक किलो अंगूर ले आओ।
      2. अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण - जिस शब्द से अनिश्चित माप-तौल का बोध हो, उसे अनिशिचत परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं।
        उदाहरण:
        1. मुकेश थोड़ा पानी ले आना।
        2. बहुत चाय है।
    3. संख्यावाचक विशेषण - जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की संख्या से संबंधित विशेषता का. बोध कराते हैं, उन्हें संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। 
      1. निश्चित संख्यावाचक विशेषण - जिस शब्द से निश्चित, संख्या का बोध हो, उसे निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं।
        उदाहरण:
        1. मैं प्रत्येक दिन मार्केट से 10 अंडे लाता हूं।
        2. मेरे ऑफिस में 2,000 कर्मचारी हैं।
      2. अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण - जिस शब्द से अनिश्वित संख्या का बोध हो, उसे अनिशिचत संख्यावाचक विशेषण कहते हैं।
        उदाहरण:
        1. कुछ बालिकाएँ पढ़ाई कर रही हैं।
        2. कुछ बालक खेलने के लिए आ रहे हैं।
    4. सार्वनामिक विशेषण - जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किसी संज्ञा की विशेषता बताने के लिए किया जाता है, उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।
      उदाहरण:
      1. किस आदमी से बात कर रहे हो।
      2. मेरा भाई घर पहुंच गया है।
  4. क्रिया - जिस शब्द या शब्द-समूह से किसी कार्य के करने या होने अथवा किसी प्रकिया, किसी घटना के होने का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं। 
    उदाहरण:
    वह बहुत बातें करती है।
    हमने खूब बातें कीं।
    1. सकर्मक क्रिया - जिन क्रियाओं के साथ उनको कर्म होता है, उन्हें सकर्मक क्रिया कहते हैं।
      जैसे - माया पत्र पढ़ती है।
      इसमें 'पढ़ना' क्रिया का फल पत्र (कर्म) पर पड़ता है अत: यह सकर्मक क्रिया है। इस वाक्य में 'क्या' प्रश्न करें कि मायां क्यों पढ़ती है? तो उत्तर मिलता है - पत्र। इसमें 'पत्र' कर्म है। अत: यह सकर्मक क्रिया हैं।
    2. अकर्मक क्रिया - जिन क्रियाओं के साथ उनका कर्म नहीं होता, वे अकर्मक क्रिया कहलाती हैं।
      जैसे - माया गाती है।
      इस वाक्य में 'गाती है' क्रिया है और इसका, कर्ता माया है। इसमें 'गाना' अकर्मक क्रिया है। यदि 'कौन' से प्रश्न करें कि 'कौन' गाता है? तो उत्तर मिलता हैं कि माया, जो कर्ता है। - इसमें 'क्या' से प्रश्न करने पर कोई उत्तर नहीं मिलता । अतः यह अकर्मक क्रिया है।
    3. संयुक्‍त क्रिया - जब दो या दो से अधिक क्रियाएँ मिलकर किसी पूर्ण क्रिया को बनाती हैं, तब वे संयुक्त क्रियाएँ कहलाती हैं।
       उदाहरण:
      1. विक्रम ने नाश्ता कर लिया है।
      2. वे स्टेडियम पहुँच चुके होंगे।
    4. प्रेणार्थक क्रिया - जहाँ कर्ता कार्य को स्वयं न करके किसी दूसरे से करवाता अथवा उसे क्रिया को करने की प्रेरणा देता है, वहाँ प्रेरणार्थक क्रिया होती है।
      उदाहरण:
      1. रामू धीरज से गाडी चलवाता है। 
      2. सुरेंदर राधा से खाना पकवाता है। 
    5. सहायक क्रिया - जो क्रियाएँ मुख्य क्रिया को काल-रचना में सहायक होती हैं, उन्हें सहायक क्रिया कहते हैं।
      उदाहरण:
      1. कल रात आधी रात तक हम पढ़ रहे थे।
      2. ओलिवर छह घंटे से गाड़ी चला रहा था
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व्याकरण
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Chapter 1.5: आलस का सुख - पाठ्य प्रश्न [Page 17]

APPEARS IN

Balbharati Integrated 7 Standard Part 3 [Hindi Medium] Maharashtra State Board
Chapter 1.5 आलस का सुख
पाठ्य प्रश्न | Q ७. | Page 17
Balbharati Hindi - Lokbharati 9 Standard Maharashtra State Board
Chapter 3 व्याकरण विभाग
व्याकरण विभाग | Q (१) | Page 84

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निम्‍न विरामचिन्ह का नाम लिखकर उनका वाक्‍य में प्रयोग करो :


निम्‍न विरमचिन्ह का नाम लिखकर उनका वाक्‍य में प्रयोग करो :

;


निम्‍न शब्द का लिंग पहचानकर लिखो 

पुस्‍तक


निम्‍नलिखित समोच्चारित भिन्नार्थक हिंदी शब्द का अर्थ लिखो तथा उन शब्द का अलग-अलग पूर्ण वाक्‍यों में प्रयोग कराे :

सुमन


शब्‍द कोश की सहायता से रेखांकित शब्द का विलोम खोजिए तथा उससे नया वाक्‍य लिखिए:

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__________________

__________________


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  2. ------------------------
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  5. ------------------------
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  8. ------------------------

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शब्‍द के वचन पहचान कर परिवर्तन कीजिए एवं अपने वाक्‍य में प्रयोग कीजिए:-

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