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Question
“मनुष्य को अपने अच्छे और सच्चे सपनों को पूरा करने से कोई रोक नहीं सकता।’’ कथन की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
Solution
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जीवन को कठोर न समझे और ऐसा न सोचें की सपनों को साकार करके ही आप खुशी पा सकते हैं। बल्कि अगर आपने अपने सपनों को प्राप्त कर लिया तो फिर आप सुखद आनंद का अनुभव कर सकते हैं, और नए सपनों की तलाश करें। समस्या और समाधान दोनों जीवन के अभिन्न हिस्सा है। बस इस बात का ध्यान रहे कि जीवन की आपाधापी में हमारे जीवन से कहीं आनंद न ओझल हो जाए। यदि आप प्रयास करें तो आनंदित जीवन आत्मा से परमात्मा के मिलान का अलोकिक माध्यम हो सकता है और सही योजना बनाएँ तो आप अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। सकारात्मकता का होना सभ्य समाज के मजबूत होने का बेहतर अवसर माना जा सकता है। यदि आप सपनों को वास्तविक बनाना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए वास्तविक जीवन में भी कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी जो सफलता की सही कुंजी होगी। ‘सपनों से सत्य की ओर' पाठ में वर्णित आनंद बनसोडे की घटना को ही ले लीजिए। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर चढ़ने का सपना देखा, अंततः उन्होंने उस सपने को सच में बदलकर दिखा दिया। वे एक सर्वथा गरीब घर में पैदा हुए थे। ऐसे घर में पैदा होने वाला व्यक्ति आनंद बनसोडे पढ़ाई में भी निकम्मा था तथा उनका स्वास्थ्य भी अच्छा नहीं था। घर की आर्थिक स्थिति तो खराब थी। इन कठिनाइयों के बावजूद वे सपना देखते रहे। लोगों ने उनकी सहायता की। उनके पिताजी ने अपना घर गिरवी रखा, माँ तथा बहनों ने अपने गहने बेचे तथा उनके जीजा जी ने ऋण लिया ताकि आनंद अपने सपने पूरे कर सकें। क्योंकि आनंद के सपने अच्छे और सच्चे थे, इसलिए लोगों की सहायता से वे अपने सपने पूरे कर सके। वे संसार की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ सके।
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‘हिमालय पर्वत की बर्फ पिघलकर खत्म हो जाए तो’ इसपर अपने विचार लिखिए।
‘एवरेस्ट’ नाम क्यों पड़ा, जानकारी प्राप्त कीजिए।
भारत में आकर हालात फिर वही थे। एवरेस्ट के लिए जितने पैसे आवश्यक थे उतने मेरे पास नहीं थे। आखिर मेरे पिता जी ने अपना घर गिरवी रखा। माँ और बहनों ने अपने गहने बेच दिए और जीजा जी ने ऋण ले लिया। सब कुछ दाँव पर लगाकर मैं एवरेस्ट चढ़ाई के लिए निकल पड़ा। काठमांडू से एवरेस्ट जाते समय ‘नामचे बाजार’ से एवरेस्ट शिखर का प्रथम दर्शन हुए। मैंने पुणे की टीम ‘सागरमाथा गिर्यारोहण संस्था’ के साथ इस मुहीम पर था। बहुत जल्द हमने १९००० फीट पर स्थित माउंट आयलैड शिखर पर चढ़ाई की। इसके बाद हम एवरेस्ट बेसकैंप में पहुँचे। चढ़ाई के पहले पड़ाव पर सागरमाथा संस्था के अध्यक्ष रमेश गुळवे जी को पक्षाघात का दौरा पड़ा। उन्हें वैद्यकीय उपचार के लिए काठमांडू से पूना ले गए किंतु उनका देहांत हो गया। मैं और मेरे सााथियों पर मानो दुख का एवरेस्ट ही टूट पड़ा। फिर भी हमने आगे बढ़ने का निर्णय लिया। |
आकृति पूर्ण कीजिए:
भारत में आकर हालात फिर वही थे। एवरेस्ट के लिए जितने पैसे आवश्यक थे उतने मेरे पास नहीं थे। आखिर मेरे पिता जी ने अपना घर गिरवी रखा। माँ और बहनों ने अपने गहने बेच दिए और जीजा जी ने ऋण ले लिया। सब कुछ दाँव पर लगाकर मैं एवरेस्ट चढ़ाई के लिए निकल पड़ा। काठमांडू से एवरेस्ट जाते समय ‘नामचे बाजार’ से एवरेस्ट शिखर का प्रथम दर्शन हुए। मैंने पुणे की टीम ‘सागरमाथा गिर्यारोहण संस्था’ के साथ इस मुहीम पर था। बहुत जल्द हमने १९००० फीट पर स्थित माउंट आयलैड शिखर पर चढ़ाई की। इसके बाद हम एवरेस्ट बेसकैंप में पहुँचे। चढ़ाई के पहले पड़ाव पर सागरमाथा संस्था के अध्यक्ष रमेश गुळवे जी को पक्षाघात का दौरा पड़ा। उन्हें वैद्यकीय उपचार के लिए काठमांडू से पूना ले गए किंतु उनका देहांत हो गया। मैं और मेरे सााथियों पर मानो दुख का एवरेस्ट ही टूट पड़ा। फिर भी हमने आगे बढ़ने का निर्णय लिया। |
परिच्छेद से प्राप्त प्रेणा लिखिए।
भारत में आकर हालात फिर वही थे। एवरेस्ट के लिए जितने पैसे आवश्यक थे उतने मेरे पास नहीं थे। आखिर मेरे पिता जी ने अपना घर गिरवी रखा। माँ और बहनों ने अपने गहने बेच दिए और जीजा जी ने ऋण ले लिया। सब कुछ दाँव पर लगाकर मैं एवरेस्ट चढ़ाई के लिए निकल पड़ा। काठमांडू से एवरेस्ट जाते समय ‘नामचे बाजार’ से एवरेस्ट शिखर का प्रथम दर्शन हुए। मैंने पुणे की टीम ‘सागरमाथा गिर्यारोहण संस्था’ के साथ इस मुहीम पर था। बहुत जल्द हमने १९००० फीट पर स्थित माउंट आयलैड शिखर पर चढ़ाई की। इसके बाद हम एवरेस्ट बेसकैंप में पहुँचे। चढ़ाई के पहले पड़ाव पर सागरमाथा संस्था के अध्यक्ष रमेश गुळवे जी को पक्षाघात का दौरा पड़ा। उन्हें वैद्यकीय उपचार के लिए काठमांडू से पूना ले गए किंतु उनका देहांत हो गया। मैं और मेरे सााथियों पर मानो दुख का एवरेस्ट ही टूट पड़ा। फिर भी हमने आगे बढ़ने का निर्णय लिया। |
आकृति पूर्ण कीजिए:-
आनंद जी ने सपनों की यात्रा इन महाद्वीपों में की :-
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प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए:-
‘अंतःप्रेणा से ही जीवन का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है’ - स्पष्ट कीजिए।
आप अपने सहपाठियों के साथ किसी पर्वतारोहण के लिए गए थे । वहाँ के रोमांचक अनुभव को शब्दबद्ध कीजिए।