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निचे दिए गए चित्र के नेटवर्क (जाल) की तुल्य धारिता प्राप्त 100 pF कीजिए। 300 V संभरण (सप्लाई) के साथ प्रत्येक संधारित्र का आवेश व उसकी वोल्टता ज्ञात कीजिए। - Physics (भौतिक विज्ञान)

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Question

निचे दिए गए चित्र के नेटवर्क (जाल) की तुल्य धारिता प्राप्त 100 pF कीजिए। 300 V संभरण (सप्लाई) के साथ प्रत्येक संधारित्र का आवेश व उसकी वोल्टता ज्ञात कीजिए।

Numerical

Solution

दिए गए नेटवर्क को संलग्न चित्र की भाँति व्यवस्थित किया जा सकता है-

सर्वप्रथम C2 व C3 श्रेणीक्रम में जुड़े हैं, इनकी तुल्य धारिता

`= ("C"_2 xx "C"_3)/("C"_2 + "C"_3) = (200 xx 200)/(200 + 200)` = 100 pF

अब यह 100 pF की धारिता C1 के साथ समान्तर क्रम में जुड़ी है,

अतः तुल्य धारिता = 100 + 100 = 200 pF

पुनः यह 200 pF, C4 के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा है।

∴ नेटवर्क की तुल्य धारिता 

C = `(200 xx "C"_4)/(200 + "C"_4) = (200 xx 100)/(200 + 100)`

या C = `200/3`pF

∴ संयोजन की वोल्टता V = 300 V

∴ संयोजन पर कुल आवेश

q = CV = `(200 xx 10^-12)/3 "F" xx 300 " V"`

`= 2 xx 10^-8 " C"`

∵ C शेष संयोजन (धारिता 200 pF) के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा है,

अतः C4 तथा शेष संयोजन, दोनों पर यही आवेश होगा।

∴ Cका विभवान्तर = `"q"/"C"_4 = (2 xx 10^-8)/(100 xx 10^-12)` = 200 V

शेष संयोजन का विभवान्तर V = 300 V – 200 V = 100 V

C1, C2 व C3 के श्रेणी संयोजन से समान्तर क्रम में जुड़ा है,

C1 का विभवान्तर = 100 V

तथा C2 व C3 के श्रेणी संयोजन का विभवान्तर = 100 V

C1 पर आवेश q1 = C1V1 = 100 x 10-12 F x 100 V = 10-8 C

C2 = C3; अतः कुल विभवान्तर 100 V इन पर बराबर-बराबर बंटेगा।

प्रत्येक का विभवान्तर = 50 V

प्रत्येक पर आवेश q2 = C2V2 = 200 x 10-12 F x 50 V = 10-8 C

अतः संयोजन की धारिता C = `200/3` pF

C1 का विभवान्तर = 100 V तथा आवेश = 10-8 C

C2 का विभवान्तर = 50 V तथा आवेश = 10-8 C

C3 का विभवान्तर = 50 V तथा आवेश = 10-8 C

C4 का विभवान्तर = 200 V तथा आवेश = 2 x 10-8 C

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संधारित्र तथा धारिता
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Chapter 2: स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता - अभ्यास [Page 89]

APPEARS IN

NCERT Physics [Hindi] Class 12
Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता
अभ्यास | Q 2.25 | Page 89

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2F वाले एक समान्तर पट्टिका संधारित्र की पट्टिका का क्षेत्रफल क्या है, जबकि पट्टिकाओं का पृथकन 0.5 cm है? [अपने उत्तर से आप यह समझ जाएँगे कि सामान्य संधारित्र uF या कम परिसर के क्यों होते हैं? तथापि विद्युत-अपघटन संधारित्रों (Electrolytic capacitors) की धारिता कहीं अधिक (0.1 F) होती है क्योंकि चालकों के बीच अति सूक्ष्म पृथकन होता है।


दो संकेन्द्री गोलीय चालकों जिनको उपयुक्त विद्युतरोधी आलम्बों से उनकी स्थिति में रोका गया है, से मिलकर एक गोलीय संधारित्र बना है। दर्शाइए कि गोलीय संधारित्र की धारिता C इस प्रकार व्यक्त की जाती है:

C = `(4piepsilon_0"r"_1"r"_2)/("r"_1 - "r"_2)`

यहाँ r1 और r2 क्रमशः बाहरी तथा भीतरी गोलों की त्रिज्याएँ है।


एक गोलीय संधारित्र के भीतरी गोले की त्रिज्या 12 cm है तथा बाहरी गोले की त्रिज्या 13 cm है। बाहरी गोला भू-सम्पर्कित है तथा भीतरी गोले पर 2.5 μC का आवेश दिया गया है। संकेन्द्री गोलों के बीच के स्थान में 32 परावैद्युतांक का द्रव भरा है।

  1. संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए।
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  3. इस संधारित्र की धारिता की तुलना एक 12 cm त्रिज्या वाले किसी वियुक्त गोले की धारिता से कीजिए। व्याख्या कीजिए कि गोले की धारिता इतनी कम क्यों है?

किसी एकल चालक की धारिता से आपका क्या अभिप्राय है?


वायु की थोड़ी-सी चालकता के कारण सारे संसार में औसतन वायुमण्डल में विसर्जन धारा 1800 A मानी जाती है। तब यथासमय वातावरण स्वयं पूर्णतः निरावेशित होकर विद्युत उदासीन क्यों नहीं हो जाता? दूसरे शब्दों में, वातावरण को कौन आवेशित रखता है?

[संकेत : पृष्ठ आवेश घनत्व = 10-9 Cm-2 के अनुरूप पृथ्वी के (पृष्ठ) पर नीचे की दिशा में लगभग 100 Vm-1 का विद्युत क्षेत्र होता है। लगभग 50 km ऊँचाई तक (जिसके बाहर यह अच्छा चालक है) वातावरण की थोड़ी सी चालकता के कारण लगभग + 1800 C का आवेश प्रति सेकण्ड समग्र रूप से पृथ्वी में पंप होता रहता है। तथापि, पृथ्वी निरावेशित नहीं होती, क्योंकि संसार में हर समय लगातार तड़ित तथा तड़ित-झंझा होती रहती है, जो समान मात्रा में ऋणावेश पृथ्वी में पंप कर देती है।]


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