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निम्नलिखित कविता के अंश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए- बाधाएँ आती हैं आएँघिरें प्रलय की घोर घटाएँ,पावों के नीचे अंगारे,सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ, - Hindi (Elective)

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Question

निम्नलिखित कविता के अंश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों से हँसते-हँसते,
आग लगाकर जलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।
उजियारे में, अंधकार में,
कल कछार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में
जीवन के शत-शत आकर्षक
अरमानों को दलना होगा।
कदम मिलकर चलना होगा।
सम्मुख फैला अमर ध्येय पथ
प्रगति चिरंतन कैसा इति अथ
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ
असफल, सफल समान मनोरथ,
सब कुछ देकर कुछ न माँगते,
पावस बनकर ढलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।
कुश काँटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुवन,
परहित हर्षित अपना तन-मन,

(क) 'सिर पर ज्वालाएँ बरसने' से क्या आशय है?      (1)

  1. सिर पर आग बरसाना
  2. सामने कठिनाई होना
  3. खतरों से खेलना
  4. सामने आग होना

(ख) सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ - पंक्ति में 'श्लथ' का क्या अर्थ है?      (1)

  1. बेहोश
  2. ऊर्जावान
  3. थका हुआ
  4. पसीना

(ग) 'कदम मिलाकर चलना होगा' - कविता के केंद्रीय भाव को दर्शाने वाले कथन है/हैं -     (1)

  1. निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा
  2. जीवन के कष्टों से ना घबराना
  3. घृणा को सर्वोपरि समझना
  1. केवल (I)
  2. केवल (II)
  3. (I) और (II)
  4. (II) और (III)

(घ) कवि ने किस प्रकार की विपत्तियों में हँसते-हँसते आगे बढ़ने को बात कही है?         (1)

(ङ) कवि ने 'परहित अर्पित अपना तन-मन' क्यों कहा है? अपने विचार प्रकट कीजिए।     (2)

(च) कवि ने हमें 'पावस' बनने को क्यों कहा है?      (2)

Comprehension

Solution

(क) सामने कठिनाई होना

(ख) थका हुआ

(ग) (I) और (II)

(घ) कवि ने कहा है कि हमें जीवन पथ पर चलते हुए सभी प्रकार की प्रतिकूलताओं में भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ना चाहिए। कवि कहता है कि बाधाएँ आएँ तो आने दीजिए, भले ही चारों ओर प्रतिकूलताओं के बादल छा जाएँ, लेकिन हमें विचलित नहीं होना चाहिए।

(ङ) कवि ने कहा है 'परहित अर्पित अपना तन-मन' क्योंकि मानव जीवन केवल अपने लिए नहीं है। परहित यानी परोपकार करने में मनुष्य को परम सुख मिलता है। कवि अपना तन-मन दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित करना चाहता है। कवि ने व्यक्ति से अधिक समाज और राष्ट्र की कल्पना की है।

(च) पावस यानी वर्षा ऋतु धरती को जल से भर देती है और चारों ओर खुशियाँ फैला देती है। किसान से लेकर प्रकृति के सभी तत्व खुश हो जाते हैं। इसी तरह मनुष्य को भी दूसरों के लिए कुछ करने की इच्छा रखनी चाहिए। हमें दूसरों की सेवा और भलाई करनी चाहिए।

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