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Question
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए -
सिनेप्टिक संचरण की क्रियाविधि
Answer in Brief
Solution 1
- शेरिंगटन ने दो तन्त्रिका कोशिकाओं के सन्धि स्थलों को युग्मानुबन्ध कहा। इसका निर्माण पूर्व सिनेप्टिक तथा पश्च सिनैप्टिक तृन्त्रिका तन्तुओं से होता है। युग्मानुबन्ध में पूर्व सिनैप्टिक तन्त्रिका के एक्सॉन या अक्षतन्तु के अन्तिम छोर पर स्थित सिनेप्टिक बटन तथा पश्च सिनैप्टिक तन्त्रिका कोशिका के डेन्ड्राइट्स के मध्य सन्धि होती है। दोनों के मध्य सिनैप्टिक विदर होता है, इससे उद्दीपन विद्युत तरंग के रूप में प्रसारित नहीं हो पाता। सिनैप्टिक बटन या घुण्डियों में सिनैप्टिक पुटिकाएँ होती हैं।
- ये तन्त्रिका संचारी पदार्थ से भरी होती हैं। उद्दीपन या प्रेरणा के क्रियात्मक विभव के कारण Ca2+ ऊतक द्रव्य से सिनैप्टिक घुण्डियों में प्रवेश करते हैं तो सिनैप्टिक घुण्डियों से तन्त्रिका संचारी पदार्थ मुक्त होता है। यह तन्त्रिका संचारी पदार्थ पश्च सिनैप्टिक, तन्त्रिका के डेन्ड्राइट पर क्रियात्मक विभव को स्थापित कर देता है, इसमें लगभग 0.5 मिली सेकण्ड का समय लगता है।
- प्रेरणा प्रसारण या क्रियात्मक विभव के स्थापित हो जाने के पश्चात् एन्जाइम्स द्वारा तन्त्रिका संचारी पदार्थ का विघटन कर दिया जाता है, जिससे अन्य प्रेरणा को प्रसारित किया जा सके।
- सामान्यतया सिनैप्टिक पुटिकाओं से ऐसीटिलकोलीन नामक तन्त्रिका संचारी पदार्थ मुक्त होता है। इसका विघटन ऐसीटिलकोलीनेस्टीरेज एन्जाइम द्वारा होता है।
- एपिनेफ्रीन, डोपामीन, हिस्टैमीन, सोमैटोस्टैटिन आदि पदार्थ अन्य तन्त्रिका संचारी पदार्थ हैं। ग्लाइसीन गामा-ऐमीनोब्यूटाइरिक आदि तन्त्रिका संचारी पदार्थ प्रेरणाओं के प्रसारण को रोक देते हैं।
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Solution 2
सिनैप्टिक ट्रांसमिशन के तंत्र:
सिनैप्स दो न्यूरॉन्स के बीच एक जंक्शन है। यह एक न्यूरॉन के एक्सोन टर्मिनल और अगले न्यूरॉन के डेंड्राइट के बीच मौजूद होता है, जो एक फांक से अलग होता है।
सिनैप्टिक ट्रांसमिशन दो प्रकार के होते हैं।
- रासायनिक संचरण
- विद्युत संचरण
1. रासायनिक संचरण:
- जब एक तंत्रिका आवेग अक्षतंतु की अंतिम प्लेट तक पहुंचता है, तो यह सिनैप्टिक फांक में एक न्यूरोट्रांसमीटर (एसिटाइलकोलाइन) छोड़ता है।
- यह रसायन न्यूरॉन के कोशिका शरीर में संश्लेषित होता है और एक्सोन टर्मिनल तक पहुँचाया जाता है।
- एसिटाइलकोलाइन फांक में फैल जाता है और अगले न्यूरॉन की झिल्ली पर मौजूद रिसेप्टर्स से जुड़ जाता है। यह झिल्ली के विध्रुवण का कारण बनता है और एक क्रिया क्षमता की शुरुआत करता है।
2. विद्युत संचरण:
- इस प्रकार के संचरण में न्यूरॉन में विद्युत धारा उत्पन्न होती है। यह विद्युत धारा एक क्रिया क्षमता उत्पन्न करती है और तंत्रिका फाइबर में तंत्रिका आवेगों के संचरण की ओर ले जाती है।
- यह संचरण की रासायनिक विधि की तुलना में तंत्रिका संचालन की तेज़ विधि का प्रतिनिधित्व करता है।
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तंत्रिकोशिका (न्यूरॉन) तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई
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