English

सक्रिय विभव उत्पन्न करने में Na+ की भूमिका का वर्णन कीजिए। - Biology (जीव विज्ञान)

Advertisements
Advertisements

Question

सक्रिय विभव उत्पन्न करने में Na+ की भूमिका का वर्णन कीजिए।

Answer in Brief

Solution

  1. सक्रिय विभव उत्पन्न करने में Na+ की भूमिका - उद्दीपन के फलस्वरूप तन्त्रिकाच्छद या न्यूरीलेमा की Na+ के लिए पारगम्यता बढ़ जाने से, Na+ ऊतक तरल से ऐक्सोप्लाज्म में तेजी से पहुंचने लगते हैं। इसके फलस्वरूप तन्त्रिका तन्तु का विध्रुवीकरण हो जाता है और तन्त्रिका तन्तु का विश्राम कला विभव क्रियात्मक कला विभव में बदलकर प्रेरणा प्रसारण में सहायता करता है।
  2. तन्त्रिका तन्तु के ऐक्सोप्लाज्म में Na+ की संख्या बहुत कम, परन्तु ऊतक तरल में लगभग 12 गुना अधिक होती है। ऐक्सोप्लाज्म में K+ की संख्या ऊतक तरल की अपेक्षा लगभग 30-35 गुना अधिक होती है।
  3. विसरण अनुपात के अनुसार Na+ की ऊतक तरल से ऐक्सोप्लाज्म में और K+ के ऐक्सोप्लाज्म से ऊतक तरल में विसरित होने की प्रवृत्ति होती है। लेकिन तंत्रिका च्छेद या न्यूरीलेमा Na+ के लिए कम और K+ के लिए अधिक पारगम्य होती है। विश्राम अवस्था में ऐक्सोप्लाज्म में ऋणात्मक आयनों और ऊतक तरल में धनात्मक आयनों की अधिकता रहती है।
  4. तन्त्रिकाच्छद या न्यूरीलेमा की बाह्य सतह पर धनात्मक आयनों और भीतरी सतह पर ऋणात्मक आयनों का जमाव रहता है। तंत्रिका च्छेद की बाह्य सतह पर धनात्मक और भीतरी सतह पर 70 mV का ऋणात्मक आकेश रहता है। इस स्थिति में तन्त्रिकाच्छद या न्यूरीलेमा विद्युत पेशी या धुवण अवस्था में बनी रहती है।
  5. तंत्रिका च्छेद के इधर-उधर विद्युत पेशी अंतर के कारण न्यूरीलेमा में बहुत-सी विभव ऊर्जा संचित रहती है। इसी ऊर्जा को विश्राम कला विभव कहते हैं। प्रेरणा संचरण में इसकी ऊर्जा का उपयोग होता है।
shaalaa.com
तंत्रिकीय तंत्र
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 18: तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय - अभ्यास [Page 237]

APPEARS IN

NCERT Biology [Hindi] Class 11
Chapter 18 तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय
अभ्यास | Q 7. (अ) | Page 237
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×