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Question
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर 60 शब्दों में लिखिए -
नाटक के विभिन्न तत्वों पर प्रकाश डालिए।
Solution
संस्कृत आचार्यों ने नाटक के तत्त्व कुल 5 माने हैं - कथावस्तु, नेता, रस, अभिनय और वृत्ति। पाश्चात्य विद्वान छः मूलतत्त्व मानते हैं - कथावस्तु, पात्र, कथोपकथन, देश-काल, शैली और उद्देश्य। हिन्दी समालोचकों में से अधिकतर विद्वान नाटक के छह तत्त्व मानते हैं - कथावस्तु, पात्र एवं चरित्र-चित्रण, संवाद अर्थात् कथोपकथन, भाषा-शैली, देश-काल अथवा पर्यावरण और उद्देश्य। हमारी दृष्टि से नाटक के इन छः तत्वों में एक सातवां तत्त्व और जोड़ देना चाहिए और वह तत्त्व है- अभिनय। किसी नाटक की समीक्षा इन्हीं सात तत्त्वों के आधार पर की जानी चाहिए। नाटक के कथानक को कथावस्तु कहते हैं। यह कथानक तीन प्रकार का होता है-प्रख्यात, उत्पाय और मिश्र। पौराणिक अथवा ऐतिहासिक कथानक को प्रख्यात, काल्पनिक कथानक को उत्पाय और इन दोनों के मिश्रित रूप को मिश्र कथानक कहते हैं। नाटक के कथानक में भाग लेने वाले व्यक्तियों को पात्र कहते हैं। नाटक के सभी तत्व इन पात्रो पर आधारित होते हैं। नाटक के प्रधान पात्र को नायक और प्रधान पात्रा को नायिका कहते हैं। संस्कृत भाषा के आचार्य नाटक के भाषा तत्व और ऑग्ल भाषा के आचार्य उसके शैली तत्व पर विशेष बल देते हैं। इस सन्दर्भ में हमारा यह निवेदन है कि शैली का मुख्य आधार शब्द होता है। शब्द ही वाक्यों में सार्थक रूप धारण कर भावों की अभिव्यक्ति करते हैं। अभिनय नाटक का प्रधान तत्त्व है। यदि किसी नाटक को रंगमंच पर अभिनय द्वारा प्रस्तुत नहीं किया जा सकता तो फिर उसे नाटक नहीं कहा जा सकता। नाटक गद्य की अन्य विधाओं से इसी अर्थ में भिन्न होता है कि उसे रंगमंच पर उसी रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।