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Academic Year: 2023-2024
Date: March 2024
Duration: 3h
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सामान्य निर्देश :-
- इस प्रश्न-पत्र में दो खंड है। खंड - अ में वस्तुपरक/बहुविकल्पी और खंड - ब में वस्तुनिष्ठ/वर्णनात्मक प्रश्न दिए गए हैं।
- प्रश्न-पत्र के दोनों खंडों में प्रश्नों की संख्या 14 है और सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
- खंड-अ में उपप्रश्नों सहित 40 वस्तुपरक प्रश्न पूछे गए हैं, सभी प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।
- खंड-ब में 8 वर्णनात्मक प्रश्न पूछे गए हैं सभी प्रश्नों के साथ दिए गए उचित विकल्प का ध्यान रखते हुए सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
- यथासंभव सभी प्रश्नों के उत्तर क्रमानुसार लिखिए।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:
'किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर उसकी आत्मा है।' यह उक्ति भारत जैसे प्राचीन राष्ट्र के संदर्भ में और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है। संस्कृति राष्ट्र के जीवन मूल्यों, आदर्शों, दर्शन आदि को मानसिक धरातल पर अभिव्यक्त करने का महत्त्वपूर्ण साधन है। भारत में इसके पीछे हजारों वर्षों के आचरण, व्यवहार, अनुभव, चिंतन, मनन आदि की पूंजी लगी हुई है। कालचक्र के सैकड़ों सुखद एवं दुखद घटनाक्रमों के दौरान कसौटी पर खरे उतर कर उन्होंने अपनी सत्यता व विश्वसनीयता अनेक बार सिद्ध की है। त्याग, संयम, परहित एवं अहिंसा या जीवों पर दया आदि भारतीय संस्कृति के सर्वोच्च मूल्यों में से हैं। संस्कृति और सभ्यता दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। अपने आयु, पद और अनुभव में बड़ों के प्रति आदर भाव, श्रद्धा व सम्मान रखना ही संस्कृति की आत्मा है, उसकी पहचान है। संस्कृति और उसके आदर्श एवं मूल्य एक दिन में निर्मित नहीं होते, वें हजारों वर्षों की अनुभूतियों तथा सिद्धांतों के परिणाम होते हैं। इन आदर्शों व मूल्यों के आधार पर ही राष्ट्रीय संस्कृति निर्मित होती है। इसका निर्माण कार्य ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका आचरण, व्यावहारिक ज़िंदगी में सहज रूप से अभिव्यक्त होना अर्थात उसका अंगीभाव हो जाना, संस्कृति कहलाता है। भारतीय संस्कृति का सर्वोच्च मूल्य त्याग है, यह मूल्य हमें पाश्चात्य संस्कृति तथा साम्यवादी संस्कृति की भोगवादी वृत्ति से दूर रखता है। इनकी इस भोगवादी संस्कृति ने आज संपूर्ण मानव जाति को विनाश के कगार पर पहुँचा दिया है और इसी प्रवृत्ति ने मनुष्य और प्रकृति के बीच एक खाई पैदा कर दी है भारतीय संस्कृति सर्वसमावेशक है, जीवमात्र में ईश्वरीय सत्ता की अनुभूति करने वाली है। भारतीय संस्कृति अपने सुखों के लिए दूसरों को नष्ट करने की बर्बरता नहीं रखती। भारतीय संस्कृति में विश्वास करने वाले लोग, राजा से भी अधिक उस संन्यासी को समादृत करते हैं, जो विश्व कल्याण के लिए संयम नियम का पालन करते हुए अपना सर्वस्वार्पण करते हैं। |
(क) 'भारत में आचरण, व्यवहार, अनुभव, चिंतन और मनन आदि की पूंजी लगी हुई है' पंक्ति से आशय है? (1)
- जीवन मूल्यों का महत्त्व
- ईश्वरीय सत्ता का योगदान
- राष्ट्रीय संस्कृति की चेतना
- त्याग का उदात्त रूप
(ख) पाश्चात्य संस्कृति तथा साम्यवादी संस्कृति की भोगवादी वृति से बचाव होता है - (1)
- संयम से
- अहिंसा से
- मूल्यों से
- चिंतन से
(ग) संस्कृति और सभ्यता एक दूसरे के पूरक हैं, क्योंकि ______. (1)
- सभ्यता के भीतर ही संस्कृति का विकास हैं
- सांस्कृतिक निर्धारक तत्व ही सभ्यता को परिभाषित करते हैं
- सभ्यता व संस्कृति का प्रभाव एक-दूसरे पर पड़ता है
- सभ्यता उन्नति है और संस्कृति उदात्तता
(घ) भारतीय संस्कृति पाश्चात्य संस्कृति से किन अर्थों में भिन्न है - (1)
- भोगवाद से मुक्त होने के कारण
- भोगवाद से युक्त होने के कारण
- उदारता के कारण
- स्वार्थ भावना के कारण
(ड) 'समादृत' शब्द का समानार्थी हो सकता है - (1)
- समवयस्क
- सम्मानित
- सुसंस्कृत
- समावेशक
(च) मनुष्य और प्रकृति के बीच खाई पैदा करने के महत्त्वपूर्ण कारण हैं - (1)
- आधुनिकता
- भोगवादी दृष्टिकोण
- प्रकृति के प्रति उदासीनता
- लालची स्वभाव
(छ) संस्कृति के मूल में समाहित है: इस कथन के मूलभाव हेतु निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए: (1)
कथन -
- एक राष्ट्र की आत्मा
- जीवन मूल्यों, दर्शन का आईना
- पाश्चात्य जगत की भोगवादी संस्कृति
- आधारभूत तत्वों का अवमूल्यन
विकल्प -
- कथन 1 व 4 सही है।
- कथन 1 व 2 सही है।
- कथन 1, 2, 3 व 4 सही है।
- कथन 1 व 3 सही है।
(ज) प्रस्तुत गद्यांश के आधार पर सांस्कृतिक संरक्षण के विषय में कहा जा सकता है - (1)
- सांस्कृतिक व्यवहार का संरक्षण करना
- सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाना
- संस्कृति का हस्तांतरण करना
- संरक्षण को व्यावहारिक रूप प्रदान करना
(झ) राष्ट्रीय संस्कृति का निर्माण होता है - (1)
- ईश्वरीय सत्ता के प्रभाव से
- विश्व के कल्याण की ओर उन्मुख होने से
- आदर्शों व मूल्यों के आधार पर
- आर्थिक विकास की ओर अग्रसर होने से
(ञ) भारतीय संस्कृति में राजा से अधिक संन्यासी को आदर देने का प्रबल कारण है - (1)
- आत्मसंयम
- परोपकार
- त्याग की भावना
- जनप्रियता
Chapter: [0.06] अपठित विभाग
दिए गए पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:
हम जंग न होने देंगे! कभी न खेतों में फिर खूनी खाद फलेगी, युद्धविहीन विश्व का सपना भंग न होने देंगे। हथियारों के ढेरों पर जिनका है डेरा, हमें चाहिए शांति, जिंदगी हमको प्यारी, |
(क) इस कविता के केन्द्रीय भाव हेतु दिए गए कथनों को पढ़कर उचित विकल्प का चयन कीजिए - (1)
कथन
- आंतरिक वैमनस्य को विस्मृत करना
- विश्व-शांति के मार्ग पर अग्रसर होना
- युद्ध की नई तकनीकों पर विचार करना
- एटम-बम से ऐतिहासिक परचम लहराना
विकल्प -
- कथन 1 व 2 सही है।
- कथन 1, 2, 3 व 4 सही है।
- कथन 1 व 4 सही है।
- कथन 1 व 3 सही है।
(ख) 'खलिहानों में नहीं मौत की फसल खिलेगी,' प्रस्तुत पंक्ति में मौत की फसल से तात्पर्य है - (1)
- युद्ध के कारण किसानों की मेहनत विफल नहीं होगी।
- प्रकृति का विनाश नहीं होगा।
- युद्ध अपार जन-हानि का कारण नहीं बनेगा।
- हरित सौन्दर्य रक्ताभ रूप में नहीं दिखेगा।
(ग) 'मुँह में शांति, बशल में बम, धोखे का फेरा' रेखांकित वाक्यांश के भाव को स्पष्ट कीजिए - (1)
- छोटा मुँह बड़ी बात
- मुँह में राम बगल में छुरी
- बारूद की पुड़िया होना
- दिल छोटा करना
(घ) अपनी आँखों में कवि ने दुनिया का सपना सँजोया है - (1)
- जहाँ युद्ध मात्र विकल्प हो
- जहाँ सर्वत्र शांति बयार चल रही हो
- हथियारों के ढेरों पर डेरा जमाना है
- हरी-भरी धरा का सपना
(ड) 'कफन बेचने वाले' कहकर कवि की लेखनी उद्घाटित करना चाह रही है - (1)
- वे मुल्क जो हथियारों की खरीद-फ़रोख्त करते हैं।
- वे मुल्क जो कफन बेचने वालों को ललकार रहे हैं।
- वे मुल्क जो विश्व-शांति के लिए हथियारों की खरीद-फ़रोख्त करते हैं।
- वे मुल्क जो अन्य मुल्कों को गुलाम बनाना चाहते हैं।
(च) 'आसमान फिर न अँगारे उगलेगा' पंक्ति में अँगारे उगलने का तात्पर्य है - (1)
- परमाणु परीक्षण पर पाबंदी से
- सौरमंडल में सूर्य की दशा परिवर्तन से
- परमाणु विस्फोट करने से
- भुखमरी के कारण मृत्युदर में वृद्धि
(छ) नागासाकी फिर नहीं जलेगी के माध्यम से कवि का अभिप्राय है - (1)
- विश्व-शांति को विस्तारित करना
- हिरोशिमा नागासाकी को याद करना
- विश्व को अस्तर-शस्त्र रहित बनाना
- संसार में अस्त्र-शस्त्र का प्रचार-प्रसार करना
(ज) कवि ने किसके विरुद्ध रण की तान छेड़ रखी है - (1)
- खेत-खलिहान खाद के विरुद्ध
- नव-सृजन की बात कहने के लिए
- निर्धनता व भुखमरी को संघर्षहीन बनाने के लिए
- हरित धरा को लहूलुहान होने से बचाने के लिए
Chapter: [0.06] अपठित विभाग
किसी घटना की सूचना देने और उसके दृश्य दिखाने के साथ ही उस घटना के बारे में प्रत्यक्षदर्शियों का कथन दिखा और सुनाकर खबर को प्रमाणिकता दी जाती है। इसे कहते हैं -
एंकर विजुअल
एंकर बाइट
एंकरिंग
एंकर सूचना
Chapter: [0.033] विशेष लेखन-स्वरुप और प्रकार
फ़ीचर के संदर्भ में कौन- सा/से कथन सही हैं?
- फ़ीचर एक सुव्यवस्थित और आत्मनिष्ठ लेखन है।
- फ़ीचर में लेखक के पास अपनी राय ज़ाहिर करने का अवसर होता है।
- फ़ीचर लेखन में छह ककारों को सम्मिलित किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
केवल (a)
केवल (b)
(a) और (b)
(b) और (c)
Chapter: [0.031] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
प्रो. स्वामी अय्यर एक महत्वपूर्ण लेखक हैं और अपने खास वैचारिक रुझान के लिए जाने जाते हैं। उनकी अपनी एक लेखन शैली भी विकसित हो चुकी है। उनकी लोकप्रियता को देखकर अखबार ने उन्हें नियमित रूप से लिखने का ज़िम्मा दिया है। इस जानकारी के आधार पर वे लिखते होंगे -
खोजी रिपोर्ट
स्तंभ
संपादकीय
प्रतिवेदन
Chapter: [0.031] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
भुगतान के आधार पर अलग-अलग समाचार पत्रों एवं संगठनों में लिखने वाले पत्रकारों को कहते हैं -
फ्री लांसर पत्रकार
अल्पकालिक पत्रकार
अंशकालिक पत्रकार
पूर्णकालिक पत्रकार
Chapter: [0.032] पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया
अनामिका कुमार विशेषीकृत रिपोर्टिंग करने वाली रिपोर्टर हैं। इन्हें कहा जाएगा -
संवाददाता
विशेष संवाददाता
उपसंपादक
विषय विशेषज्ञ
Chapter: [0.033] विशेष लेखन-स्वरुप और प्रकार
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए -
जो है वह खड़ा है किसी अलक्षित सूर्य को |
(क) जो है वह खडा है बिना किसी स्तंभ के.......' वह जो बिना सहारे के खड़ी है - (1)
- दार्शनिकता
- आध्यात्मिकता
- धुएं की विशालता
- पानी की पवित्रता
(ख) 'अपनी दूसरी टांग से बिल्कुल बेखबर' पंक्ति का आशय है कि - (1)
- अध्यात्मिकता से अनभिज्ञ होना
- आधुनिकता से अनभिज्ञ होना
- सांसारिकता से अनभिज्ञ होना
- दार्शनिकता से अनभिज्ञ होना
(ग) राख के स्तंभ से क्या अभिप्राय है? (1)
- पूजा-पाठ की सामग्री के ढेर से
- शवों के राख के ढेर से
- मिट्टी के ढेर से
- मुरझाए फूलों के ढेर से
(घ) आस्था, विरक्ति, विश्वास, आश्चर्य और भक्ति का मिला-जुला रूप दिखाई देता है - (1)
- श्रद्धा और अंधभक्ति में
- मोक्ष की अवधारणा में
- मिथकीय आस्था में
- बनारस की आध्यात्मिकता में
(ङ) मनुष्य के हाथ स्तंभ की भांति खड़े हो जाते हैं - (1)
- मंदिर की ध्वजा को प्रमाण करने के लिए
- अदृश्य को अर्घ्य देने के लिए
- किसी की मदद के लिए
- श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए
Chapter: [0.0104] केदारनाथ सिंह : (क) बनारस, (ख) दिशा
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए -
चौधरी साहब एक खासे हिंदुस्तानी रईस थे। वसंत पंचमी होली इत्यादि, अवसरों पर उनके यहाँ खूब नाचरंग और उत्सव हुआ करते थे। उनकी हर एक अदा से रियासत और तबीयतदारी टपकती थी। कंधों तक बाल लटक रहे हैं। आप इधर से उधर टहल रहे हैं। एक छोटा-सा लड़का पान की तश्तरी लिए पीछे-पीछे लगा हुआ है। बात की काट-छाँट का क्या कहना है। जो बातें उनके मुँह से निकलती थीं, उनमें एक विलक्षण वक्रता रहती थी। उनकी बातचीत का ढंग उनके लेखों के ढंग से एकदम निराला होता था। नौकरों तक के साथ उनका संवाद सुनने लायक होता था। |
(क) प्रस्तुत गद्यांश में किस की विशेषताओं का वर्णन किया गया है? (1)
- भारतेंदु की
- राधेश्याम की
- रामचंद्र की
- बदरीनारायण की
(ख) चौधरी साहब एक खासे हिन्दुस्तानी रईस थे, खासे रईस से तात्पर्य है - (1)
- दिखावा करने वाला
- उत्सव मनाने वाला
- गंभीर व्यक्तित्व वाला
- व्यंग्य करने वाला
(ग) चौधरी साहब की बातचीत के अंदाज़ से यह पता चलता है कि वे खासे हिंदुस्तानी रईस के साथ-साथ ______थे। (1)
- साहित्य प्रेमी
- भाषानुरागी
- रसिक धर्मी
- सौन्दर्य प्रेमी
(घ) प्रस्तुत गद्यांश में 'विलक्षण वक्रता' से तात्पर्य स्पष्ट होता? (1)
- मुहावरेदार
- कुटिलता
- वाक् चातुर्य
- अनोखी वचन भंगिमा
(ङ) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1)
कथन - हर एक अदा से रियासत और तबीयतदारी टपकती थी।'
कारण - चौधरी साहब की गिनती धनी व्यक्तियों में होती थी। सहृदयता के लिए भी प्रसिद्ध थे।
- कथन (A) सही है और कारण (R) सही व्याख्या है।
- कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत है।
- कथन (A) सही है किंतु कारण गलत है।
- कथन (A) सही है किंतु कारण (R) सही व्याख्या नहीं है।
Chapter: [0.020099999999999996] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
'तो हम सौ लाख बार बनाएंगे' इस कथन के संदर्भ में सूरदास के चरित्र की विशेषता है -
आर्थिक मदद की चाह रखने वाला
अत्यधिक परिश्रमी व्यक्तित्व
सांत्वना का अभिलाषी
हार न मानने की प्रवृत्ति वाला
Chapter: [0.01] सूरदास की झोंपड़ी
'अभिलाषाओं की राख है' से क्या अभिप्राय है?
सभी पैसों का जल जाना
झोंपड़ी का जल जाना
ईर्ष्या के कारण झोपड़ी जलना
चाहतों का जल जाना
Chapter: [0.01] सूरदास की झोंपड़ी
कथन (A) - नारी प्रकृति का सजीव रूप है।
कारण (R) - नारी शरीर से उन्हें बिस्कोहर की फसलों, वनस्पतियों की उत्कट गंध आती है।
कथन (A) सही है और कारण (R) सही व्याख्या है।
कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत है।
कथन (A) सही है किंतु कारण गलत है।
कथन (A) सही है किंतु कारण (R) सही व्याख्या नहीं है।
Chapter: [0.03] बिस्कोहर की माटी
कथन (A) - जीवन के मर्म का ज्ञान ही दुखों से मुक्ति है।
कारण (R) - सूरदास विजय गर्व की तरंग में राख के ढेर को दोनों हाथों से उड़ाने लगा।
कथन (A) सही है किंतु कारण (R) सही व्याख्या नहीं है।
कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत है।
कथन (A) सही है किंतु कारण गलत है।
कथन (A) सही है और कारण (R) सही व्याख्या है।
Chapter: [0.01] सूरदास की झोंपड़ी
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निम्नलिखित शब्द-युग्मों को सुमेलित कीजिए -
भाग-1 | भाग-2 | ||
(1) | भरभंडा | (क) | खेतों में पानी देने के लिए छोटी-छोटी नालियाँ बनाई जाती है |
(2) | कोइयां | (ख) | एक प्रकार का फल |
(3) | बरहा | (ग) | कमल का फूल |
(4) | पुरइ | (घ) | कोका-बेली |
(1)-(ख), (2)-(घ), (3)-(क), (4)-(ग)
(1)-(क), (2)-(ग), (3)-(ख), (4)-(घ)
(1)-(ख), (2)-(ग), (3)-(घ), (4)-(क)
(1)-(क), (2)-(ख), (3)-(ग), (4)-(घ)
Chapter: [0.03] बिस्कोहर की माटी
विकास की औद्योगिक सभ्यता, उजाड़ की अपसभ्यता है क्योंकि ______।
वर्तमान युग को औद्योगिकीकरण का युग कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं है।
आधुनिक सभ्यता के विकास से प्रकृति के साथ छेड़छाड़ हो रही है।
औद्योगीकरण के लगातार बढ़ने से उद्योग धंधों में खूब वृद्धि हुई है।
अपशिष्ट पदार्थों, प्लास्टिक की थैलियों के प्रयोग से नदियों का प्रवाह बाधित हुआ है।
Chapter: [0.04] अपना मालवा -खाऊ-उजाड़ू सभ्यता में
'पग-पग पर नीर वाला मालवा नीर विहीन हो गया' से तात्पर्य है -
पर्यावरण और मनुष्य का अत्यंत घनिष्ठ संबंध है।
पहले जल से परिपूर्ण अब वर्षा की मात्रा कम हो गई है।
लद्दाख जैसे स्थानों पर भी बर्फ़बारी प्रभावित हुई है।
जल संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास चल रहा है।
Chapter: [0.04] अपना मालवा -खाऊ-उजाड़ू सभ्यता में
निम्नलिखित विषय पर 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए -
समाज में बढती आर्थिक असमानताएँ
Chapter: [0.05] लेखन कौशल्य
निम्नलिखित विषय पर 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए -
आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस का समाज पर प्रभाव
Chapter: [0.05] लेखन कौशल्य
निम्नलिखित विषय पर 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए -
परीक्षा के दिन
Chapter: [0.05] लेखन कौशल्य
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर 60 शब्दों में लिखिए -
कविता में बिंब की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
Chapter: [0.034] कैसे बनती है कविता
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर 60 शब्दों में लिखिए -
नाटक के विभिन्न तत्वों पर प्रकाश डालिए।
Chapter: [0.035] नाटक लिखने का व्याकरण
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर 60 शब्दों में लिखिए -
कहानी का हमारे जीवन से क्या संबंध है? परिभाषित कीजिए।
Chapter: [0.036000000000000004] कैसे लिखें कहानी
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -
समाचार माध्यमों में प्रिंट माध्यम की विशेषताएँ लिखिए।
Chapter: [0.031] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -
समाचार माध्यमों में प्रिंट माध्यम की विशेषताएँ लिखिए।
Chapter: [0.031] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -
रेडियो समाचार लेखन की भाषा पर प्रकाश डालिए।
Chapter: [0.031] विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
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'जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा'- पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
Chapter: [0.0101] जयशंकर प्रसाद : (क) देवसेना का गीत, (ख) कार्नेलिया का गीत
माघ के मास में विरहिणी के भावों को अपने शब्दों में लिखिए।
Chapter: [0.0108] मलिक मुहम्मद जायसी : बारहमासा
भरत का आत्म परिताप उनके व्यक्तित्व के किस पक्ष की ओर संकेत करता है? वर्तमान में ऐसे व्यक्तित्व की आवश्यकता सिद्ध कीजिए।
Chapter: [0.010700000000000001] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -
ये पत्थर ये चट्टानें तोड़ो तोड़ो तोड़ो |
Chapter: [0.0106] रघुवीर सहाय : (क) वसंत आया, (ख) तोड़ो
निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -
पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े। नीरज नयन नेह जल बाढ़े॥ कहब मोर मुनिनाथ निबाहा। एहि तें अधिक कहौं मैं काहा॥ मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ। अपराधिहु पर कोह न काऊ॥ मो पर कृपा सनेहू बिसेखी। खेलत खुनिस न कबहूँ देखी॥ |
Chapter: [0.010700000000000001] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
'शेर' कहानी में उद्धृत व्यंग्य को स्पष्ट करते हुए लेखक के उद्देश्य का वर्णन कीजिए।
Chapter: [0.0206] असगर वजाहत : शेर, पहचान, चार हाथ, साझा
घड़ीसाज़ी का इम्तहान पास करने से लेखक के अभिप्राय को स्पष्ट कीजिए।
Chapter: [0.0202] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
'बड़ी बहुरिया का संवाद हरगोबिन सुना सकने में असमर्थ था' कथन के माध्यम से हरगोबिन की तत्कालीन स्थिति की विवेचना कीजिए।
Chapter: [0.0204] फणीश्वरनाथ 'रेणु' : संवदिया
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -
मेरे लिए एक दूसरी दृष्टि से भी यह अनूठा अनुभव था। लोग अपने गाँवों से विस्थापित होकर कैसी अनाथ, उन्मूलित ज़िंदगी बिताते हैं, यह मैंने हिंदुस्तानी शहरों के बीच बसी मज़दूरों की गंदी, दम घुटती, भयावह बस्तियों और स्लम्स में कई बार देखा था, किंतु विस्थापन से पूर्व वे कैसे परिवेश में रहते होंगे, किस तरह की ज़िंदगी बिताते होंगे, इसका दृश्य अपने स्वच्छ, पवित्र खुलेपन में पहली बार अमझर गाँव में देखने को मिला। |
Chapter: [0.0207] निर्मल वर्मा : जहाँ कोई वापसी नहीं
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -
बालक के मुख पर विलक्षण रंगों का परिवर्तन हो रहा था, हृदय में कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई की झलक आँखों में दिख रही थी। कुछ खाँसकर, गला साफ़ कर नकली परदे के हट जाने पर स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, 'लड्डू'। पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरा श्वास घुट रहा था। अब मैंने सुख से साँस भरी। उन सबने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था। पर बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह 'लड्डू' की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों पर मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं। |
Chapter: [0.0202] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -
"सच्चे खिलाड़ी कभी रोते नहीं, बाजी पर बाजी हारते हैं, चोट पर चोट खाते हैं, धक्के सहते हैं पर मैदान में डटे रहते हैं।" परीक्षा के समय को आधार मानकर 'सूरदास की झोंपड़ी' पाठ क्या संदेश देता है?
Chapter: [0.01] सूरदास की झोंपड़ी
लेखक बिसनाथ ने किन आधारों पर अपनी माँ की तुलना बत्तख से की है?
Chapter: [0.03] बिस्कोहर की माटी
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