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निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए - ये पत्थर ये चट्टानें ये झूठे बंधन टूटेंतो धरती का हम जानें सुनते हैं मिट्टी में रस है जिससे उगती दूब है - Hindi (Elective)

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Question

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -

ये पत्थर ये चट्टानें
ये झूठे बंधन टूटें
तो धरती का हम जानें
सुनते हैं मिट्टी में रस है जिससे उगती दूब है
अपने मन के मैदानों पर व्यापी कैसी ऊब है
आधे आधे गाने

तोड़ो तोड़ो तोड़ो
ये ऊसर बंजर तोड़ो
ये चरती परती तोड़ो
सब खेत बनाकर छोड़ो
मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को
हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन की खीज को?
गोड़ो गोड़ो गोड़ो

Answer in Brief

Solution

कवि हमें उद्बोधन देता हुआ कहता है कि धरती को खेती के लिए तैयार करने हेतु हमें चट्टानें, पत्थर ताईने होंगे और मन को उर्वर बनाने के लिए रूढ़ियों तथा बन्धनों से छुटकारा पाना होगा। परती जमीन को खेत में बदलना मन की पहली आवश्यकता है। मिट्टी में रस है जिससे दूब उगती है पर उसके लिए हमें परिश्रम करके पहले खेत तैयार करना होगा। मन की ऊब और खीज भी अनुपजाऊ भूमि के समान है जो मन की सृजनशीलता में बाधक है। हमें इस ऊब और खीज से छुटकारा पाना होगा। मन को आशा और उत्साह से युक्त करना होगा तभी उसमें कवितारूपी दूब (हरियाली) उग सकेगी।

कवि चाहता है कि धरती से अच्छी फसलें और पैदावार प्राप्त करने के लिए हमें अनुपजाऊ जमीन को तैयार करना होगा। हमें चरागाहों और खाली पड़ी भूमि को जोतकर और गुड़ाई करके खेती के योग्य बनाना होगा। हमें ऐसी समस्त भूमि को खेती करने लायक बनाकर ही अपना काम समाप्त करना होगा। 

खेत की मिट्टी में जब नमी होगी और वह बीज बोने लायक हो जायेगी, तभी उसमें पड़े हुए बीज को पोषण मिलेगा और नये पौधे उत्पन्न होंगे तथा बढ़ेंगे। इसी प्रकार हमें अपने मन की खीज को भी हटाना होगा। खीज की भावना से मन के मुक्त होने पर ही उसमें पौधों रूपी नवीन भाव उत्पन्न होंगे और सुन्दर सरस कविता की रचना सम्भव हो सकेगी। खेत की भूमि के समान ही हमें अपने मन को कविता की रचना के लिए भावनापूर्ण और क्रियाशील बनाना होगा। 

shaalaa.com

Notes

  • संदर्भ - 1 अंक
  • प्रसंग - 1 अंक
  • व्याख्या - 3 अंक
  • विशेष - 1 अंक
तोड़ो
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2023-2024 (March) Board Sample Paper

RELATED QUESTIONS

'पत्थर' और 'चट्टान' शब्द किसके प्रतीक हैं?


भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को
हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन की खीज को?
गोड़ो गोड़ो गोड़ो


कविता का आरंभ 'तोड़ो तोड़ो तोड़ो' से हुआ है और अंत 'गोड़ो गोड़ो गोड़ो' से। विचार कीजिए कि कवि ने ऐसा क्यों किया?


ये झूठे बंधन टूटें
तो धरती को हम जानें
यहाँ पर झूठे बंधनों और धरती को जानने से क्या अभिप्राय हैं?


'आधे-आधे गाने' के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?


मिट्टी और बीज से संबंधित और भी कविताएँ हैं, जैसे सुमित्रानंदन पंत की 'बीज'। अन्य कवियों की ऐसी कविताओं का संकलन कीजिए और भित्ति पत्रिका में उनका उपयोग कीजिए।


‘तोड़ो’ कविता नवसृजन की प्रेरणा है। कथन के आलोक में अपने विचार प्रकट कीजिए।


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