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Question
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -
"सच्चे खिलाड़ी कभी रोते नहीं, बाजी पर बाजी हारते हैं, चोट पर चोट खाते हैं, धक्के सहते हैं पर मैदान में डटे रहते हैं।" परीक्षा के समय को आधार मानकर 'सूरदास की झोंपड़ी' पाठ क्या संदेश देता है?
Solution
घीसू का यह वाक्य 'मिठुआ खेल में रोते हो', सूरदास को अंदर तक झकझोर गया। वह चिंता, शोक तथा ग्लानि से मुक्त हो उठ खड़ा हुआ। उसे लगा सच्चे खिलाड़ी कभी नहीं रोते, वाजी पर वाजी हारते हैं, चोट पर चोट खाते हैं, धक्के सहते हैं, पर मैदान में डटे रहते हैं। किसी से न जलते हैं, न चिढ़ते हैं। हिम्मत व धैर्य से काम लेते हैं।
जिंदगी खेल है हँसने के लिए दिल बहलाने के लिए, रोने के लिए नहीं। हमें भी जीवन को खेल समझकर खेलना है, इसमें निराशा कुंठा का कोई स्थान नहीं। हमें भी सूरदास की तरह सच्चा खिलाड़ी बनकर निराशा में आशा का दामन नहीं छोड़ना है। किसी से ईर्ष्या एवं जलन नहीं करनी अपितु साहस से विपत्ति और विषम परिस्थितियों का सामना करना चाहिए। भगवान उसकी सहायता करता है, जो अपनी सहायता खुद करता है। कर्म द्वारा जीवन-संग्राम को जीतना चाहिए। सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर जीवन को सफल बनाना चाहिए।
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