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अभिलाषाओं की राख से तात्पर्य है - - Hindi (Elective)

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Question

अभिलाषाओं की राख से तात्पर्य है -

Options

  • जमा पूँजी का जल जाना

  • इच्छा की पूर्ति होना

  • आकांक्षा का अधूरा रह जाना

  • चरित्र पर कलंक लगना

MCQ

Solution

आकांक्षा का अधूरा रह जाना

shaalaa.com
सूरदास की झोंपड़ी
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2022-2023 (March) Sample

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'चूल्हा ठंडा किया होता, तो दुश्मनों का कलेजा कैसे ठंडा होता?' नायकराम के इस कथन में निहित भाव को स्पष्ट कीजिए।


भैरों ने सूरदास की झोपड़ी क्यों जलाई?


'यह फूस की राख न थी, उसकी अभिलाषाओं की राख थी।' संदर्भ सहित विवेचन कीजिए।


जगधर के मन में किस तरह का ईर्ष्या-भाव जगा और क्यों?


सूरदास जगधर से अपनी आर्थिक हानि को गुप्त क्यों रखना चाहता था?


'सूरदास उठ खड़ा हुआ और विजय-गर्व की तरंग में राख के ढेर को दोनों हाथों से उड़ाने लगा।' इस कथन के संदर्भ में सूरदास की मनोदशा का वर्णन कीजिए।

'तो हम सौ लाख बार बनाएँगे।' इस कथन के संदर्भ में सूरदास के चरित्र का विवेचन कीजिए।


इस पाठ का नाट्य रूपांतर कर उसकी प्रस्तुति कीजिए।


प्रेमचंद के उपन्यास 'रंगभूमि' का संक्षिप्त संस्करण पढ़िए।


सूरदास कहाँ तो नैराश्य, ग्लानि, चिंता और क्षोभ के अपार जल में गोते खा रहा था, कहाँ यह चेतावनी सुनते ही उसे ऐसा मालूम हुआ किसी ने उसका हाथ पकड़कर किनारे पर खड़ा कर दिया।

नकारात्मक मानवीय पहलुओं पर अकेले सूरदास का व्यक्तित्व भारी पड़ गया। जीवन मूल्यों की दृष्टि से इस कथन पर विचार कीजिए।


'तो हम सौ लाख बार बनाएंगे' इस कथन के संदर्भ में सूरदास के चरित्र की विशेषता है -


'अभिलाषाओं की राख है' से क्या अभिप्राय है?


कथन (A) - जीवन के मर्म का ज्ञान ही दुखों से मुक्ति है।

कारण (R) - सूरदास विजय गर्व की तरंग में राख के ढेर को दोनों हाथों से उड़ाने लगा।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -

"सच्चे खिलाड़ी कभी रोते नहीं, बाजी पर बाजी हारते हैं, चोट पर चोट खाते हैं, धक्के सहते हैं पर मैदान में डटे रहते हैं।" परीक्षा के समय को आधार मानकर 'सूरदास की झोंपड़ी' पाठ क्या संदेश देता है?


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