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Question
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
तिवारी जी | आपका पहला उपन्यास कौन सा है ? |
नागर जी | पहला उपन्यास लिखा 944 में 'महाकाल', जो छपा 946 में। बंगाल से लौटकर इसे लिखा था। |
तिवारी जी | क्या यही बाद में 'भूख' नाम से प्रकाशित हुआ? |
नागर जी | हाँ। |
तिवारी जी | नागर जी, आप अपने समय के और कौन-कौन से लेखकों के संपर्क-प्रभाव में रहे? |
नागर जी | जगन्नाथदास रत्नाकर, गोपाल राय गहमरी, प्रेमचंद, किशोरी लाल गोस्वामी, लक्ष्मीधर वाजपेयी आदि के नाम याद आते हैं। माधव शुक्ल हमारे यहाँ आते थे। वे आजानुबाहु थे, ढीला कुरता पहनते थे और कुरते की जेब में जलियाँवाला बाग की खून सनी मिट्टी हमेशा रखे रहते थे। 1931 से 37 तक मैं प्रतिवर्ष कोलकाता जाकर शरतचंद्र से मिलता रहा, उनके गाँव भी गया। |
तिवारी जी | पुराने साहित्यकारों में आप किसको अपना आदर्श मानते हैं? |
नागर जी | तुलसीदास को तो मुझे घुट्टी में पिलाया गया है। बाबा, शाम को नित्य प्रति 'रामचरितमानस' मुझसे पढ़वाकर सुनते थे। श्लोक जबरदस्ती याद करवाते थे। |
तिवारी जी | नागर जी, आपने 'खंजन नयन' में सूरदास के चमत्कारों का बहुत विस्तार से वर्णन किया है। क्या इनपर आपका विश्वास है? |
- संजाल पूर्ण कीजिए: [2]
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- तालिका पूर्ण कीजिए: [2]
रचनाकार रचना अमृतलाल नागर जी ______ तुलसीदास ______ - कृति पूर्ण कीजिए: [2]
- तालिका पूर्ण कीजिए: [2]
- गद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए:
- उपसर्गयुक्त शब्दों के मूल शब्द: [1]
उपसर्गयुक्त शब्द मूल शब्द (1) अप्रकाशित ______ (2) अविश्वास ______ - प्रत्यययुक्त शब्द: [1]
- ______
- ______
- उपसर्गयुक्त शब्दों के मूल शब्द: [1]
- 'पुस्तकें ज्ञान प्राप्ति का साधन' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिये। [2]
Comprehension
Solution
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रचनाकार रचना अमृतलाल नागर जी महाकाल (भूख), खंजन नयन तुलसीदास रामचरितमानस
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उपसर्गयुक्त शब्द मूल शब्द (1) अप्रकाशित प्रकाशित (2) अविश्वास विश्वास
- प्रकाशित
- जबरदस्ती
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- पुस्तकें ज्ञान का भंडार होती हैं और गुरु की तरह मार्गदर्शन करती हैं। ये व्यक्ति को न केवल ज्ञान प्रदान करती हैं, बल्कि सही दिशा भी दिखाती हैं। इनमें विज्ञान, धर्म, खेल, नृत्य, संगीत, चिकित्सा जैसे हर विषय की जानकारी होती है। जो व्यक्ति जिस विषय में ज्ञान अर्जित करना चाहता है, वह उस विषय की पुस्तक पढ़ सकता है। यहाँ तक कि अज्ञानी व्यक्ति भी पुस्तकों के माध्यम से ज्ञानी बन सकता है। यही कारण है कि पुस्तकों को ज्ञान प्राप्ति का महत्वपूर्ण साधन माना गया है।
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