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Question
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
उस दिन लड़के ने तैश में आकर लक्ष्मी की पीठ पर चार डंडे बरसा दिये थे। वह बड़ी भयभीत और घबराई थी। जो भी उसके पास जाता, सिर हिला उसे मारने की कोशिश करती या फिर उछलती-कूदती, गले की रस्सी तोड़कर खूँटे से आजाद होने का प्रयास करती। करामत अली इधर दो-चार दिनों से अस्वस्थ था। लेकिन जब उसने यह सुना कि रहमान ने गाय की पीठ पर डंडे बरसाए हैं तो उससे रहा नहीं गया। वह किसी प्रकार चारपाई से उठकर धीरे-धीरे चलकर बधान में आया। आगे बढ़कर उसके माथे पर हाथ फेरा, पुचकारा और हौले-से उसकी पीठ पर हाथ फेरा। लक्ष्मी के शरीर में एक सिहरन-सी दौड़ गई। "ओह! कंबख्त ने कितनी बेदर्दी से पीटा है।" उसकी बीवी रमज़ानी बोली - "लो, चोट की जगह पर यह रोगन लगा दो। बेचारी को आराम मिलेगा।" 'करामत अली गुस्से में बोला - "क्या अच्छा हो अगर इसी लाठी से तुम्हारे रहमान के दोनों हाथ तोड़ दिए जाएँ। कहीं इस तरह पीटा जाता है?" रमजानी बोली - "लक्ष्मी ने आज भी दूध नहीं दिया।" "तो उसकी सजा इसे लाठियों से दी गई।" "रहमान से गलती हो गई, इसे वह भी कबूलता है।" |
(1) आकृति में उत्तर लिखिए: [2]
(2) उत्तर लिखिए: [2]
मार के कारण लक्ष्मी की हुई स्थिति
- ______
- ______
(3) गद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए:
- एकवचन और बहुवचन शब्द की एक जोड़ी ______ [1]
- शब्द समूह के लिए एक शब्द लिखिये: [1]
- पालतू गाय-बैलों के रहने का स्थान - ______
- छोटा पलंग अथवा खाट - ______
(4) "अपनी गलती को स्वीकारने में ही समझदारी है" विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। [2]
Solution
(1)
(2)
- वह बड़ी भयभीत और घबराई थी।
- जो भी उसके पास जाता, सिर हिला उसे मारने की कोशिश करती थी।
(3)
एकवचन बहुवचन लाठी लाठीयाँ
- पालतू गाय-बैलों के रहने का स्थान - बथान
- छोटा पलंग अथवा खाट - चारपाई
(4) मनुष्य होने के नाते गलतियाँ करना स्वाभाविक है। हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी गलती करता है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि वह व्यक्ति बुरा या अज्ञानी है। व्यक्ति को अपनी गलती समय पर स्वीकारनी चाहिए और उसे सुधारने का प्रयास करना चाहिए। ऐसा करने से कई बार बिगड़ा हुआ काम भी सुधर सकता है और समाज में उसकी एक सकारात्मक छवि बनती है। इसलिए कहा जाता है कि गलती स्वीकार करना ही बुद्धिमानी और समझदारी की निशानी है।