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‘निंदक नियरे राखिए’ इस पंक्‍ति के बारे में अपने विचार लिखिए । - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

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Question

‘निंदक नियरे राखिए’ इस पंक्‍ति के बारे में अपने विचार लिखिए।

Answer in Brief

Solution

 निंदक नियरे राखिए आँगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना निर्मल करे सुभाय। कवि का कहना है कि हमें उस व्यक्ति को अपने निकट रखना चाहिए जो हमारी निंदा करता है। जैसे सिक्के के दो पहलू होते हैं, वैसे ही निंदा करने के भी दो पहलू होते हैं। हम देखते हैं कि निंदक हमारी निंदा कर रहा है, पर यह क्यों नहीं सोचते कि वह हमारी मदद कर रहा है। उसकी निंदा की वजह से हमें अपनी बुराइयां दिखाई देती हैं और हम उन्हें सुधार सकते हैं। वहीं, चापलूस लोग अपने स्वार्थ के चलते हमारे अवगुणों की भी प्रशंसा करते हैं, जिससे हमें अपना व्यवहार हमेशा अच्छा ही लगता है।

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गागर में सागर
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Chapter 2.1: गागर में सागर - स्वाध्याय [Page 28]

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Balbharati Hindi (Composite) - Lokvani Class 9 Maharashtra State Board
Chapter 2.1 गागर में सागर
स्वाध्याय | Q १ | Page 28
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