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न्यायपालिका संवैधानिक संशोधन का प्रस्ताव नहीं ला सकती परन्तु उसे संविधान की व्याख्या करने का अधिकार है। व्याख्या द्वारा वह संविधान को काफी हद तक बदल सकती है। - Political Science (राजनीति विज्ञान)

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Question

न्यायपालिका संवैधानिक संशोधन का प्रस्ताव नहीं ला सकती परन्तु उसे संविधान की व्याख्या करने का अधिकार है। व्याख्या द्वारा वह संविधान को काफी हद तक बदल सकती है।

Options

  • सही

  • गलत

MCQ
True or False

Solution

न्यायपालिका संवैधानिक संशोधन का प्रस्ताव नहीं ला सकती परन्तु उसे संविधान की व्याख्या करने का अधिकार है। व्याख्या द्वारा वह संविधान को काफी हद तक बदल सकती है - गलत

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संविधान में इतने संशोधन क्यों किए गए हैं ?
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Chapter 9: संविधान - एक जिवंत दस्तावेज़ - प्रश्नावली [Page 217]

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NCERT Political Science [Hindi] Class 11
Chapter 9 संविधान - एक जिवंत दस्तावेज़
प्रश्नावली | Q 2. (ग) | Page 217

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राष्ट्रपति किसी संशोधन विधेयक को संसद के पास पुनर्विचार के लिए नहीं भेज सकता।


संविधान में संशोधन करने का अधिकार केवल जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के पास ही होता है।


संसद संविधान के किसी भी खंड में संशोधन कर सकती है।


निम्नलिखित में से कौन भारतीय संविधान की संशोधन प्रक्रिया में भूमिका निभाते हैं?
इस प्रक्रिया में ये कैसे शामिल होते हैं?

  1. मतदाता
  2. भारत का राष्ट्रपति
  3. राज्य की विधानसभाएँ
  4. संसद
  5. राज्यपाल
  6. न्यायपालिका।

इस अध्याय में आपने पढ़ा कि संविधान का 42वाँ संशोधन अब तक का सबसे विवादास्पद संशोधन रहा है। इस विवाद के क्या कारण थे?

  1. यह संशोधन राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान किया गया था। आपातकाल की घोषणा अपने आप में ही एक विवाद का मुद्दा था।
  2. यह संशोधन विशेष बहुमत पर आधारित नहीं था।
  3. इसे राज्य विधानपालिकाओं का समर्थन प्राप्त नहीं था।
  4. संशोध्न के कुछ उपबन्ध विवादास्पद थे।

निम्नलिखित वाक्यों में कौन-सा वाक्य विभिन्न संशोधनों के सम्बन्ध में विधायिका और न्यायपालिका के टकराव की सही व्याख्या नहीं करता?


सन् 2000-2003 के बीच संविधान में अनेक संशोधन किए गए। इस जानकारी के आधार पर आप निम्नलिखित में से कौन-सा निष्कर्ष निकालेंगे-


भारतीय संविधान में अनेक संशोधन न्यायपालिका और संसद की अलग-अलग व्याख्याओं का परिणाम रहे हैं। उदाहरण सहित व्याख्या करें।


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