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पारितंत्र सेवा के अंतर्गत बाढ़ व भू-अपरदन (सॉयल-इरोजन) नियंत्रण आते हैं। यह किस प्रकार पारितंत्र के जीवीय घटकों (बायोटिक कंपोनेंट) द्वारा पूर्ण होते हैं? - Biology (जीव विज्ञान)

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Question

पारितंत्र सेवा के अंतर्गत बाढ़ व भू-अपरदन (सॉयल-इरोजन) नियंत्रण आते हैं। यह किस प्रकार पारितंत्र के जीवीय घटकों (बायोटिक कंपोनेंट) द्वारा पूर्ण होते हैं?

Answer in Brief

Solution

पारितंत्र को संरक्षित कर बाढ़, सूखा व भू-अपरदन जैसी समस्याओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है। वृक्षों की जड़ें मृदा कणों को जकड़े रहती हैं, जिससे जल तथा वायु प्रवाह में अवरोध उत्पन्न होते हैं। वृक्षों के कटान से यह अवरोध समाप्त हो जाता है। मृदा की ऊपरी उपजाऊ परत तीव्र वायु या वर्षा के जल के साथ बहकर नष्ट हो जाती है। इसे मृदा अपरदन कहते हैं। पहाड़ों में जल ग्रहण क्षेत्रों के वृक्षों को काटने से मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ आ जाती है और यह अधिक गंभीर रूप धारण कर लेती है। बाढ़ के समय नदियों का पानी किनारों से तेज गति से टकराता है और इन्हें काटता रहता है। इसके फलस्वरूप नदी का प्रवाह सामान्य दिशा के अतिरिक्त अन्य दिशाओं में भी होने लगता है। वृक्षारोपण, बाढ़ नियंत्रण तथा मृदा अपरदन को रोकने का प्रमुख उपाय है। वृक्ष रेगिस्तान में वायु अपरदन को रोकने में उपयोगी होते हैं। वृक्ष वायु गति की तीव्रता को कम करने में सहायक होते हैं जिससे अपरदन की दर कम हो जाती है।

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जैव विविधता का संरक्षण
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Chapter 15: जैव - विविधता एवं संरक्षण - अभ्यास [Page 295]

APPEARS IN

NCERT Biology [Hindi] Class 12
Chapter 15 जैव - विविधता एवं संरक्षण
अभ्यास | Q 8. | Page 295
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