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पेशी संकुचन के सर्पी तंतु सिद्धान्त को परिभाषित करें। - Biology (जीव विज्ञान)

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Question

पेशी संकुचन के सर्पी तंतु सिद्धान्त को परिभाषित करें।

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Short Answer

Solution 1

हक्सले
ने रेखित पेशी तन्तुओं का इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा अध्ययन करके इनमें उपस्थित एक्टिन तथा मायोसिन छड़ों का विशिष्ट विन्यास देखा। इस विन्यास को देखते हुए इन्होंने पेशी तन्तु संकुचन का सप तन्तु या छड़ विसर्पण सिद्धान्त दिया।

रेखित पेशियों के संकुचन की कार्य-विधि

रेखित पेशियों में संकुचन तन्त्रिका उद्दीपन के फलस्वरूप होता है। एक्टिन छड़े मायोसिन छड़ों के ऊपर फिसलकर इनके भीतर (सामियर के केन्द्र की ओर) प्रवेश कर जाती हैं, जिससे पेशी तन्तु में संकुचन हो जाता है।

पेशी संकुचन का सप तन्तु या छड़ विसर्पण सिद्धान्त

सामान्य अवस्था में सार्कोमियर में ATP तथा मैग्नीशियम आयन होते हैं; कैल्सियम आयन भी सूक्ष्म मात्रा में होते हैं। एक्टिन छड़े ट्रोपोमायोसिन के साथ इस प्रकार जुड़ी रहती हैं कि ये मायोसिन छड़ों के साथ नहीं जुड़ सकतीं। जब पेशी तन्तु को तन्त्रिका आवेग द्वारा श्रेशहोल्ड उद्दीपन प्राप्त होता है, तब पेशी तन्तु के अन्तर्द्रव्यीय जाल (ER) से Ca++ (कैल्सियम आयन) सार्कोमियर में मुक्त हो जाते हैं। ये कैल्सियम आयन ट्रोपोमायोसिन के साथ संयुक्त हो जाते हैं और एक्टिन छड़े स्वतन्त्र हो जाती हैं। इसी समय ATP के जल विघटन के फलस्वरूप ऊर्जा मुक्त होती है। इस ऊर्जा की उपस्थिति में एक्टिने तथा मायोसिन सक्रिय हो जाते हैं और नए सेतु बन्धों की रचना होती है। इसके फलस्वरूप एक्टिन छड़े मायोसिन छड़ों के ऊपर फिसलकर साकमियर के केन्द्र की ओर चली जाती हैं। एक्टिन तथा मायोसिन मिलकर एक्टोमायोसिन की रचना करते हैं।

सेतु बंधन के बनने और टूटने की अवस्थाएँ।

इस प्रक्रिया में पेशी तन्तु की लम्बाई कम हो जाती है अर्थात् संकुचन हो जाता है। जब उद्दीपन समाप्त हो जाता है, तब सक्रिय पम्पिंग द्वारा कैल्सियम आयनों को अन्तर्रव्यीय जाल में पम्प कर दिया जाता है। ट्रोपोमायोसिन स्वतन्त्र हो जाता है, इससे एक्टिन व मायोसिन के बीच के सेतु बन्ध टूट जाते हैं। एक्टिन फिर ट्रोपोमायोसिन के साथ संयुक्त (bind) हो जाता है। पेशी तन्तु वापस अपनी पुरानी लम्बाई में लौट आता है। मृत्यु के पश्चात् ATP के न बनने के कारण Ca++ वापस सार्कोप्लाज्मिक जाल में नहीं जा सकते; अतः पेशियाँ सिकुड़ी रह जाती हैं और शरीर अकड़ा रह जाता है।

ऊर्जा आपूर्ति:
पेशी संकुचन के लिए ऊर्जा की आपूर्ति ATP द्वारा होती है। पेशियों में ATP का निर्माण ग्लाइकोजन के अपचय के फलस्वरूप होता है।

पेशी संकुचन के समय ATP के जल विघटन से ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

\[\ce{ATP ->[hydrolysis]ADP + Pi + \text{ऊर्जा}}\]

पेशियों में एक और उच्च ऊर्जा यौगिक उपस्थित होता है, जिसे क्रिएटिन फॉस्फेट कहते हैं। इसका प्रयोग भी ATP निर्माण में होता है।

\[\ce{ADP + PCr -> ATP + Cr}\]

विश्रामावस्था में ATP द्वारा फिर से क्रिएटिन फॉस्फेट का निर्माण हो जाता है।

ATP + Cr → PCr + ADP

इस प्रकार पेशी में क्रिएटिन फॉस्फेट का भण्डार बना रहता है, जो आवश्यकता पड़ने पर ATP प्रदान कर सकता है।

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Solution 2

मांसपेशियों के संकुचन के स्लाइडिंग फिलामेंट सिद्धांत के अनुसार, एक्टिन और मायोसिन फिलामेंट्स सरकोमेरेस की लंबाई को कम करने के लिए क्रॉस-ब्रिज की मदद से एक-दूसरे से आगे बढ़ते हैं।

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पेशी - पेशी संकुचन की क्रियाविधि
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Chapter 17: गमन एवं संचलन - अभ्यास [Page 228]

APPEARS IN

NCERT Biology [Hindi] Class 11
Chapter 17 गमन एवं संचलन
अभ्यास | Q 2. | Page 228
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