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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 9th Standard

‘परिस्थिति के सामने हार न मानकर उसे सहर्ष स्वीकार करने में ही जीवन की सार्थकता है’, स्पष्ट कीजिए। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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Question

‘परिस्थिति के सामने हार न मानकर उसे सहर्ष स्वीकार करने में ही जीवन की सार्थकता है’, स्पष्ट कीजिए।

Answer in Brief

Solution

जीवन में सुख और दुख का चक्र सतत चलता रहता है। जिस तरह इंसान सुख के क्षणों का आनंद लेता है, उसी तरह उसे मुश्किल समय को भी खुशी से स्वीकार कर उसका सामना करना चाहिए। प्रतिकूल हालातों में रोने या हार मानने से व्यक्ति के जीवन में केवल पीड़ा ही बढ़ती है। अपनी जिंदगी को सुखी बनाने के लिए उसे मुश्किलों का सामना धैर्यपूर्वक करना चाहिए और समस्याओं का हल ढूंढना चाहिए। कुछ परिस्थितियां बहुत ही कष्टकारी होती हैं, पर इसका यह मतलब नहीं कि कोई व्यक्ति जीवन जीना ही छोड़ दे। उन चुनौतियों का सामना करने के लिए उसे खुद को और अधिक मजबूत बनाना चाहिए। जीवन की सार्थकता इसी में निहित है।

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अपराजेय
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Chapter 2.1: अपराजेय - पाठ के आँगन में [Page 81]

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Balbharati Hindi - Lokbharati 9 Standard Maharashtra State Board
Chapter 2.1 अपराजेय
पाठ के आँगन में | Q (३) | Page 81

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रिक्‍त स्‍थान पूर्ण कीजिए:


परिच्छेद से ऐसे दो शब्‍द ढूँढ़कर लिखिए जिनका वचन परिवर्तन नहीं होता।


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केवल एक शब्द में उत्तर लिखिए:

जिनमें चल-फिरने की क्षमता का अभाव हो


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