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प्रश्न
‘परिस्थिति के सामने हार न मानकर उसे सहर्ष स्वीकार करने में ही जीवन की सार्थकता है’, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
जीवन में सुख और दुख का चक्र सतत चलता रहता है। जिस तरह इंसान सुख के क्षणों का आनंद लेता है, उसी तरह उसे मुश्किल समय को भी खुशी से स्वीकार कर उसका सामना करना चाहिए। प्रतिकूल हालातों में रोने या हार मानने से व्यक्ति के जीवन में केवल पीड़ा ही बढ़ती है। अपनी जिंदगी को सुखी बनाने के लिए उसे मुश्किलों का सामना धैर्यपूर्वक करना चाहिए और समस्याओं का हल ढूंढना चाहिए। कुछ परिस्थितियां बहुत ही कष्टकारी होती हैं, पर इसका यह मतलब नहीं कि कोई व्यक्ति जीवन जीना ही छोड़ दे। उन चुनौतियों का सामना करने के लिए उसे खुद को और अधिक मजबूत बनाना चाहिए। जीवन की सार्थकता इसी में निहित है।
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