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प्रश्न
पाठ (अपराजेय) में प्रयुक्त वाक्य पढ़कर व्यक्ति में निहित भाव लिखिए:
‘मैं जानता हूँ कि, जीवन का विकास पुरुषार्थ में हैं, आत्महीनता में नहीं।’
उत्तर
इस वाक्य से अमरनाथ की सकारात्मक सोच का पता चलता है। दुर्घटना के बाद उनकी टाँग काटी गई, फिर भी उन्होंने जीवन से संघर्ष करना छोड़ा नहीं। उन्होंने चित्रकारी व बागवानी को अपने जीने का जरिया बना लिया। फिर उनकी दाइर् बाँह काट दी गई। फिर भी उन्होंने जीवन से हार नहीं मानी। उन्होंने शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू किया, लेकिन बीमारी की वजह से उनकी आवाज भी चली गई। जीवन में इतना सब कुछ खो देने के बावजूद अमरनाथ अपनी स्थिति से दुखी नहीं थे। वे दृढ़निश्चयी व अपराजेय थे। उन्होंने जीवन को अपने अनुसार व्यतीत करने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन परिस्थितियों से कभी हार नहीं मानी, क्योंकि वे जानते थे कि जीवन का विकास पुरुषार्थ में है, आत्महीनता में नहीं।
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