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पुण्यश्लोक अहिल्‍याबाई होळकर जी की जीवनी का अंश पढ़िए और उनका सामाजिक कार्य बताइए। - Hindi [हिंदी]

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Question

पुण्यश्लोक अहिल्‍याबाई होळकर जी की जीवनी का अंश पढ़िए और उनका सामाजिक कार्य बताइए।

Long Answer

Solution

अहिल्याबाई होळकर का जन्म महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के चौड़ी नामक गाँव में मनकोजी शिंदे के घर सन् 1725 में हुआ था। साधारण शिक्षित अहिल्याबाई 10 वर्ष की अल्पायु में ही मालवा में इतिहासकार बन गई। अपनी कर्तव्यनिष्ठा से उन्होंने सास-ससुर, पति व अन्य सम्बन्धियों के हृदयों को जीत लिया। समयोपरांत एक पुत्र, एक पुत्री की माँ बनीं। बता दें कि इस वंश के संस्थापक मल्हारराव होळकर  थे, उनका शासन मालवा से लेकर पंजाब तक था। मल्हारराव होलकर का निधन 1766 में हुआ था। मालवा इलाके के वे पहले मराठा सूबेदार हुए। अहिल्याबाई मालवा राज्य की होळकर रानी बनी थी। अहिल्या को लोगों के द्वारा सम्मान से राजमाता भी कहकर पुकारा जाता था। अहिल्याबाई होळकर ने ही कन्याकुमारी से लेकर हिमालय तक अनेक मंदिर, घाट, तालाब, दान संस्थाएँ, भोजनालय, धर्मशालाएँ, बावरिया इत्यादि का निर्माण करवाया। अहिल्या के दिल में अपनी प्रजा के लिए काफी प्यार और दया थी। वे जब भी किसी को मुसीबत या तकलीफ में देखती थीं तो उसे हल करने के लिए आगे कदम बढ़ाती थीं। इसलिए ही लोग भी उन्हें काफी सम्मान और प्यार देते थे। अहिल्याबाई होळकर का इतिहास करीब 30 साल के अद्भुत शासनकाल के दौरान मराठा प्रांत की राजमाता अहिल्याबाई होलकर ने एक छोटे से गांव इंदौर को एक समृद्ध एवं विकसित शहर बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने यहां पर सड़कों की दशा सुधारने, गरीबों और भूखों के लिए खाने की व्यवस्था करने के साथ-साथ शिक्षा पर भी काफी जोर दिया। अहिल्याबाई की बदौलत ही आज इंदौर की पहचान भारत के समृद्ध एवं विकसित शहरों में होती है। महारानी अहिल्याबाई की पहचान एक विनम्र एवं उदार शासक के रुप में थी। उनके हृदय में जरूरमदों, गरीबों और असहाय व्यक्ति के लिए दया और परोपकार की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। उन्होंने समाज में विधवा महिलाओं की स्थिति पर भी खास काम किया और उनके लिए उस वक्त बनाए गए कानून में बदलाव भी किया था। इसके अलावा उन्होंने महिला शिक्षा पर भी खास जोर दिया। अपने जीवन में तमाम परेशानियाँ झेलने के बाद जिस तरह महारानी अहिल्याबाई ने अपनी अदम्य नारी शक्ति का इस्तेमाल किया था, वो काफी प्रशंसनीय है। अहिल्याबाई कई महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। उनके सम्मान और उनकी याद में ही मध्य प्रदेश के इन्दौर में हर साल भाद्रपद कृष्णा चतुर्दशी के दिन अहिल्योत्सव का आयोजन किया जाता है। अहिल्याबाई होळकर का नाम समूचे भारतवर्ष में बहुत ही सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्हें लेकर कई पुस्तकों में भी लिखा गया है।

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अच्छा पड़ोस
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Chapter 1.03: अच्छा पड़ोस - स्वाध्याय [Page 11]

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Balbharati Hindi - Kumarbharati 9 Standard Maharashtra State Board
Chapter 1.03 अच्छा पड़ोस
स्वाध्याय | Q ३ | Page 11
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