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राष्ट्र को परिभाषित करना क्यों कठिन है? - Sociology (समाजशास्त्र)

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Question

राष्ट्र को परिभाषित करना क्यों कठिन है?

Long Answer

Solution

  • राष्ट्र एक अनूठे किस्म का समुदाय होता है, जिसका वर्णन तो आसान है पर इसे परिभाषित करना कठिन है।
  • हम ऐसे अनेक विशिष्ट राष्ट्रों का वर्णन कर सकते हैं, जिनकी स्थापना साझे – धर्म, भाषा, नृजातीयता, इतिहास अथवा क्षेत्रीय संस्कृति जैसी साझी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक संस्थाओं |
    के आधार पर की गई है।
  • किंतु किसी राष्ट्र के पारिभाषिक लक्षणों को निर्धारित करना कठिन है।
  • प्रत्येक संभव कसौटी के लिए अनेक अपवाद तथा विरोधी उदाहरण पाए जाते हैं।
  • उदाहरण के लिए, ऐसे बहुत से राष्ट्र हैं जिनकी एक समान भाषा, धर्म, नृजातीयता इत्यादि नहीं हैं। दूसरी तरफ ऐसी अनेक भाषाएँ, धर्म या नृजातियाँ हैं जो कई राष्ट्रों में पाई जाती हैं। लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि यह सभी मिलकर एक एकीकृत राष्ट्र का निर्माण करते हैं। सरल शब्दों में कहें तो राष्ट्र समुदायों का समुदाय है। एक राजनीतिक समूहवाद के अंतर्गत किसी देश में नागरिक अपनी आवश्यकताओं का सहभाजन करते हैं। राष्ट्र ऐसे समुदायों से निर्मित होते हैं, जिनके अपने राज्य होते हैं।
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सांस्कृतिक समुदाय एवं राष्ट्र-राज्य
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Chapter 6: सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ - प्रश्नावली [Page 147]

APPEARS IN

NCERT Sociology [Hindi] Class 12
Chapter 6 सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ
प्रश्नावली | Q 3. | Page 147
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