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Question
सामुदायिक पहचान क्या होती है और वह कैसे बनती है?
Long Answer
Solution
- सामुदायिक पहचान जन्म तथा अपनापन पर आधारित होती है न कि किसी अर्जित योग्यता | अथवा उपलब्धि के आधार पर।
- इस प्रकार की पहचानें प्रदत्त कहलाती हैं। अर्थात् ये जन्म से निर्धारित होती हैं तथा संबंधित व्यक्तियों की पसंद अथवा नापसंद इसमें शामिल नहीं होती।
- लोग उन समुदायों से संबंधित होकर अत्यंत सुरक्षित एवं संतुष्ट महसूस करते हैं।
- प्रदत्त पहचाने जैसे कि सामुदायिक पहचान से मुक्ति पाना कठिन होता है। यहाँ तक कि यदि हम इसे अस्वीकार करने की कोशिश करते हैं तब भी लोग उन्हीं चिह्नों से जोड़कर हमारी पहचान हूँढ़ने की कोशिश करते हैं।
- सामुदायिक संबंधों के बढ़ते हुए दायरे; जैसे – परिवार, रिश्तेदारी, जाति, भाषा हमारी सार्थकता प्रदान करते हैं तथा हमें पहचान देते हैं।
- प्रदत्त पहचाने तथा सामुदायिक भावना सर्वव्यापी होती हैं। प्रत्येक व्यक्ति की एक मातृभूमि होती है, एक मातृभाषा होती है तथा एक निष्ठा होती है। हम सभी अपनी-अपनी पहचान के प्रति प्रतिबद्ध होते हैं।
- समुदाय हमें मातृभाषा, मूल्य एवं संस्कृति प्रदान करता है, जिसके माध्यम से हम विश्व का आकलन करते हैं। यह हमारी स्वयं की पहचान को भी संबंध प्रदान करता है।
- समाजीकरण की प्रक्रिया में हमारे आसपास से जुड़े लोगों के साथ निरंतर संवाद शामिल होता है। इसमें माता-पिता, संबंधी, परिवार तथा समुदाय सम्मिलित होता है। अतएव समुदाय हमारी पहचान का एक
प्रमुख हिस्सा है। - सामुदायिक प्रतिद्वंद्विता से निपटना बहुत कठिन होता है। इसका कारण यह है कि प्रत्येक पक्ष एक-दूसरे को अपना दुश्मन समझता है तथा अपनी अच्छाइयों को तथा दूसरों की बुराइयों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने की उनकी प्रवृत्ति होती है।
- यह बात उनके लिए समझना कठिन है, जो कि रचनात्मक जोड़े हैं किंतु दोनों की छवियाँ एक-दूसरों के विपरीत हैं।
- कभी दोनों ही पक्ष बिलकुल सही या गलत हो सकते हैं तो कभी इतिहास यह तय करता है कि कौन आक्रामक है और कौन पीड़ित।
- लेकिन यह तब होता है जब मामला शांत हो गया होता है।
- पहचान संबंधी द्वंद्व की स्थिति में परस्पर सम्मत सच्चाई के किसी भाव को स्थापित करना बहुत कठिन होता है।
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सांस्कृतिक समुदाय एवं राष्ट्र-राज्य
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