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रंगों की विमाएँ क्या हैं? - Psychology (मनोविज्ञान)

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Question

रंगों की विमाएँ क्या हैं?

Answer in Brief

Solution

सामान्य वर्ण-दृष्टि का एक व्यक्ति लगभग 70 लाख से अधिक विभिन्न रंगों की छटाओं में अंतर कर सकता है। हमारे रंगों के अनुभव का वर्णन तीन मूल विमाओं के रूप में किया जा सकता है। ये विमाएँ हैं- वर्ण, संतृष्ति एवं धुति। वर्ण (Hue) रंगों का ही एक गुण है। सरल शब्दों में यह रंगों के नाम बताता है; जैसे- लाल, नीला तथा हरा। वर्ण तरंगदैर्घ्य के अनुसार घटता-बढ़ता रहता है तथा प्रत्येक रंग की पहचान विशिष्ट तरंगदैर्घ्य के आधार पर होती है। उदाहरण के लिए, नीले रंग का तरंगदैर्घ्य 465 नैनोमीटर तथा हरे रंग का तरंगदैर्घ्य 500 नैनोमीटर होता है। अवर्णक रंग; जैसे- काला, सफेद एवं भूरा वर्ण के आधार पर नहीं पहचाने जाते हैं। संतृप्ति (Saturation) एक मनोवैज्ञानिक गुण है जो किसी सतह अथवा च्स्तुके वर्ण की सापेक्ष मात्रा से संबंधित होती है। एक तरंगदैर्घ्य का प्रकाश (एकवर्णी) अधिक संतृप्त होता है। जब हम कई तरंगदैयों का मिश्रण करते हैं तो संतृप्ति की मात्रा घट जाती है। भूरा रंग पर्णतया र्णतया असंतृप्त होता है। दूयुति (Brightness) प्रकाश की प्रत्यक्षित तीव्रता होती है। यह वर्ण एवं दोनों रंगों के आधार पर बदलती रहती है। सफेद एवं काला रंग दुयुति विमा के शीर्ष एवं तल को प्रदर्शित करते हैं। सफेद रंग में दूयुति की मात्रा सबसे अधिक होती है, जबकि काले रंग में दयुति की मात्रा सबसे कम होती है।

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Chapter 5: संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ - समीक्षात्मक प्रश्न [Page 109]

APPEARS IN

NCERT Psychology [Hindi] Class 11
Chapter 5 संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ
समीक्षात्मक प्रश्न | Q 3. (b) | Page 109
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