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Question
साम्य स्थिरांक का व्यंजक लिखते समय समझाइए कि शुद्ध द्रवों एवं ठोसों को उपेक्षित क्यों किया जा सकता है?
Solution
[शुद्ध द्रव] या [शुद्ध ठोस] = `"मोलों की संख्या"/"L में आयतन"`
`= ("द्रव्यमान"//"आण्विक द्रव्यमान")/"आयतन"`
`= "द्रव्यमान"/"आयतन" xx 1/("आण्विक द्रव्यमान")`
`= "घनत्व"/"आण्विक द्रव्यमान"`
शुद्ध ठोस या शुद्ध द्रव के आण्विक द्रव्यमान तथा घनत्व नियत ताप पर निश्चित होते हैं, अतः इनके मोलर सांद्रण नियत होते हैं। यही कारण है कि इन्हें साम्य स्थिरांक के व्यंजक में उपेक्षित किया जा सकता है।
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निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक Kc का व्यंजक लिखिए-
\[\ce{2Cu(NO3)2(s) ⇌ 2CuO(s) + 4NO2(g) + O2(g)}\]
निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक Kc का व्यंजक लिखिए-
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निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक Kc का व्यंजक लिखिए-
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\[\ce{2N2(g) +O2(g) ⇌ 2N2O(g)}\]
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\[\ce{2NO(g) + Br2(g) ⇌ 2NOBr(g)}\]
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साम्य \[\ce{2H2(g) + CO(g) ⇌ CH3OH(g)}\] पर प्रभाव बताइए।
H2 मिलाने पर
साम्य \[\ce{2H2(g) + CO(g) ⇌ CH3OH(g)}\] पर प्रभाव बताइए।
CH3OH मिलाने पर
साम्य \[\ce{2H2(g) + CO(g) ⇌ CH3OH(g)}\] पर प्रभाव बताइए।
CO हटाने पर
साम्य \[\ce{2H2(g) + CO(g) ⇌ CH3OH(g)}\] पर प्रभाव बताइए।
CH3OH हटाने पर