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Question
शरद में ही हरसिंगार फूलता है। पितर-पक्ख (पितृपक्ष) में मालिन दाई घर के दरवाजे पर हरसिंगार की राशि रख जाती थीं, तो खड़ी बोली हुई। गाँव की बोली में 'कुरइ जात रहीं।' बहुत ढेर सारे फूल मानो इकट्ठे ही अनायास उनसे गिर पड़ते थे। 'कुरइ देना' है तो सकर्मक लेकिन सहजता अकर्मक की है। |
उपर्युक्त पंक्तियाँ किसकी आत्मकथा का वर्णन कर रही हैं और इस कथा के केंद्र में क्या है?
Solution
शरद में हरसिंगार का खिलना, गाँव की बोली व अन्य वनस्पतियों का वर्णन लेखक विश्वनाथ द्वारा अपनी आत्मकथा बिस्कोहर की माटी के माध्यम से किया गया है। इस पूरी कथा के केंद्र में है- बिस्कोहर, जो लेखक का गाँव है और एक पात्र बिसनाथ जो स्वयं लेखक विश्वनाथ हैं। गर्मी, वर्षा एवं शरद ऋतु में गाँव में होने वाली परेशानियों का वर्णन भी लेखक ने किया है। पूरी रचना में लेखक ने अपने अनुभव और देखे गए प्राकृतिक सौंदर्य को प्रस्तुत किया है।
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- ग्रामीण जीवन में प्रकृति के प्रति अलगाव है।
इन कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं -
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए -
- भरभंडा : फूल
- डोंडहा : साँप
- कोइयाँ : जलपुष्प
- धामिन : अनाज
इन युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं -
‘कोई भी तालाब अकेला नहीं है।’ यह कथन दर्शाता है -
कथन (A) - नारी प्रकृति का सजीव रूप है।
कारण (R) - नारी शरीर से उन्हें बिस्कोहर की फसलों, वनस्पतियों की उत्कट गंध आती है।
निम्नलिखित शब्द-युग्मों को सुमेलित कीजिए -
भाग-1 | भाग-2 | ||
(1) | भरभंडा | (क) | खेतों में पानी देने के लिए छोटी-छोटी नालियाँ बनाई जाती है |
(2) | कोइयां | (ख) | एक प्रकार का फल |
(3) | बरहा | (ग) | कमल का फूल |
(4) | पुरइ | (घ) | कोका-बेली |