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Question
समझाइए कि लकड़ी के जलने और उसे छोटे टुकड़ों में काटने को दो भिन्न प्रकार के परिवर्तन क्यों माना जाता है।
Solution
- लकड़ी के टुकड़ों को पुन: जोड़कर मूल टुकड़ा नहीं बना सकते, लेकिन लकड़ी के गुण में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। यह भौतिक परिवर्तन है।
- लकड़ी के जलने के बाद उसे मूल रूप में वापस नहीं लाया जा सकता है।
- इसके गुणों में भी परिवर्तन हो जाता है तथा ऊष्मा का उत्पादन होता है। यह रासायनिक परिवर्तन है। यहाँ लकड़ी के जलने और उसे छोटे टुकड़ों में काटने की दो भिन्न अवस्थाएँ हैं।
- इस स्थिति में दो भिन्न प्रकार के परिवर्तन माने जाते हैं।
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