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Question
संथालों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह क्यों किया?
Long Answer
Solution
- संथालों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह निम्नलिखित कारणों से किया
- संथाल अपनी खानाबदोश जिंदगी को छोड़ जंगलों के अंदरूनी हिस्सों में एक जगह बस गए और बाजार के लिए कई तरह के वाणिज्यिक फसलों की खेती करने लगे और व्यापारियों तथा साहूकारों के साथ लेन-देन करने लगे थे। किंतु संथालों ने जल्दी ही समझ लिया कि उन्होंने जिस भूमि पर खेती शुरू की थी, वह उनके हाथों से निकलती जा रही है क्योंकि संथालों ने जिस जमीन को साफ करके खेती शुरू की थी, उस पर सरकार भारी कर लगा रही थी साहूकार लोग ऊँची दर पर ब्याज लगा रहे थे और कर्ज अदा न किए जाने की स्थिति में जमीन पर ही कब्जा कर रहे थे। जमींदार लोग भी दामिन-ए-कोह के इलाके पर अपने नियंत्रण का दावा कर रहे थे।
- 1850 के दशक तक संथाल लोग यह महसूस करने लगे थे कि अपने लिए एक ऐसे आदर्श संसार का निर्माण करना बहुत जरूरी है जहाँ उनका अपना शासन हो। अत: जमींदारों, साहूकारों तथा औपनिवेशिक राज के विरुद्ध विद्रोह करने का समय अब आ गया है। 1855-56 के संथाल विद्रोह के बाद संथाल परगना का निर्माण कर दिया गया, जिसके लिए 5500 वर्गमील का क्षेत्र भागलपुर और वीरभूम जिलों में से लिया गया।
- ब्रिटिश सरकार ने संथालों के असंतोष को शांत करने के लिए एक नया परगना बनाया और कुछ विशेष तरह के कानून लागू करके उन्हें संतुष्ट करने की असफल कोशिश की। अपने एक अधिकारी बुकानन को उनके बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए विस्तृत आदिवासी क्षेत्रों का सर्वे करने का कार्य सौंपा। कंपनी मूलतः एक मुनाफा कमाने वाली आर्थिक इकाई थी। जब कंपनी ने अपनी शक्ति को सुदृढ़ बना लिया और अपने व्यवसाय का विकास कर लिया तो वह उन प्राकृतिक संसाध नों की खोज में जुट गई जिन पर कब्जा करके उनका मनचाहा उपयोग कर सकती थी। फलतः उसने अपने परिदृश्यों तथा राजस्व स्रोतों का सर्वेक्षण किया, खोज-यात्राएँ आयोजित कीं और जानकारी इकट्ठी करने के लिए भू-विज्ञानियों, भूगोलवेत्ताओं, वनस्पति विज्ञानियों और चिकित्सकों को भेजा।
- अंग्रेज अधिकारियों ने संथालों के नियंत्रित प्रदेशों और भू-भागों में मूल्यवान पत्थरों और खनिजों को खोजने की कोशिश की। उन्होंने लौह-खनिज, अभ्रक, ग्रेनाइट और साल्टपीटर से संबंधित सभी स्थानों की जानकारी प्राप्त कर ली। यही नहीं, उन्होंने बड़ी चालाकी के साथ नमक बनाने और लोहा निकालने की संथालों और स्थानीय पद्धतियों का निरीक्षण किया। इन सबसे संथाल बहुत चिढ़ गए।
- अंग्रेज कम-से-कम समय में, कम-से-कम मेहनत करके ज्यादा-से-ज्यादा प्राकृतिक संसाधनों, खनिजों, वन-उत्पादों आदि | का दोहन करना चाहते थे। कुछ अंग्रेज़ संथालों की जीवन-शैली की कटु आलोचना करते थे। वे पर्यावरण संरक्षण की चिंता न करके वनों को काटकर कृषि विस्तार के समर्थक थे। ऐसा करने से संथालों को मिलने वाले स्वच्छ प्राकृतिक वातावरण, शिकार स्थलों, चारागाहों, वन में रह रहे पशुओं और जीव-जंतुओं तथा उत्पादों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। इन सबके कारण संथालों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह किए।
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