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Question
टिप्पणी लिखिए।
मानवीय मस्तिष्क
Answer in Brief
Solution
- मस्तिष्क की रचना अत्यंत मृदु परंतु उतनी ही विकसित होती है। मस्तिष्क तंत्रिका संस्थान का प्रमुख नियंत्रण करने वाला अंग है तथा यह कोटर (खोपड़ी) में संरक्षित होता है। मेरूरज्जू (Spinal cord) को कशेरूदण्ड (रीढ़ की हड्डी (Vertebral column) से संरक्षण मिलता है। केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के अस्थि और मृदु ऊतकों के बीच की खोखली जगह में संरक्षक मस्तिष्काच्छद होते हैं। मस्तिष्क के विभिन्न भागों की गुहाओं को मस्तिष्क विवर कहते हैं जबकि मेरूरज्जू की लंबी गुहा को केंद्रीय वाहिनी (Central Canal) कहते हैं। मस्तिष्क विवर (Meninges), केंद्रीय वाहिनी तथा मस्तिष्काच्छद अंतर्गत अंतरिक्ष में प्रमस्तिष्क मेरूद्रव (Cerebro-Spinal Fluid) होता है। यह द्रव केंद्रीय तंत्रिका तंत्र संस्थान को पोषक द्रव्यों की आपूर्ति करता है तथा आघातों को अवशोषित कर उसे संरक्षित करता है।
- एक वयस्क मानव मस्तिष्क का भार लगभग 1300 से 1400 ग्राम तक होता है और यह लगभग 100 खरब तंत्रिकाओं से मिलकर बना होता है।
- अपने मस्तिष्क का बायाँ भाग शरीर के दाएँ जबकि मस्तिष्क का दाहिना भाग शरीर के बाएँ भाग को नियंत्रित करता है। इसके अतिरिक्त मस्तिष्क का बायाँ भाग हमारे वार्तालाप, लेखनकार्यतथा तर्कसंगत विचार नियंत्रित करता है और दाँया भाग हमारी कला-क्षमताएँ नियंत्रित करता है।
1. प्रमस्तिष्क (Cerebrum):
यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है। यह दो प्रमस्तिष्किय अर्धगोलों से बना होता है। दृढ तंतु और नाड़ी (Nerve track) क्षेत्र इन दो अर्ध गोलों को जोड़ते हैं। मस्तिष्क का दो तिहाई प्रमस्तिष्क से व्याप्त होता है। इसी कारण प्रमस्तिष्क को बड़ा मस्तिष्क कहा जाता है। प्रमस्तिष्क की बाह्य सतह अत्यधिक मुड़े हुए अनियमित घेरों से युक्त और रोएँदार होती है जिन्हें संवलन अथवा लपेट कहते हैं। इनके कारण प्रमस्तिष्क के पृष्ठभाग का क्षेत्रफल बढ़ता है तथा तंत्रिका कोशिकाओं को पर्याप्त जगह प्राप्त होती है।
प्रमस्तिष्क के कार्य: ऐच्छिक गतिविधियों का नियंत्रण, मन की एकाग्रता, आयोजना, निर्णयक्षमता, स्मरणशक्ति, बुद्धिमत्ता तथा बुद्धिविषयक क्रियाएँ।
2. अनुमस्तिष्क (Cerebellum):
यह मस्तिष्क का छोटा भाग होता है तथा यह मस्तिष्क कोटर (खोपड़ी) के पीछे की ओर तथा प्रमस्तिष्क के नीचे के ओर होता है। इसका पृष्ठभाग घेरों के बदले शीर्ष ओर गर्त के रूप में होता है।
अनुमस्तिष्क के कार्य:
1. ऐच्छिक गतिविधियों में समन्वय स्थापित करना।
2. शरीर का संतुलन बनाए रखना।
3. मस्तिष्कपुच्छ (Medulla-oblongata):
यह मस्तिष्क का पश्चतम भाग है। इसके उर्ध्वतल में दो त्रिभुजाकार सम्मुखीय रचनाएँ होती हैं। उन्हें पिरामिड कहते हैं। इसके पश्चभाग का आगे मेरूरज्जू में रूपांतरण होता है।
मस्तिष्कपुच्छ के कार्य:
लंब नाड़ी: हृदय की गति, रक्तप्रवाह, श्वासोच्छ्वास, छींकना, खाँसना, लार निर्मिति आदि अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण।
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केंद्रीय तंत्रिका तंत्र
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