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Question
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विद्युत निर्मिती और पर्यावरण
Answer in Brief
Solution
जीवाश्म ईंधन तथा परमाणु ऊर्जा का उपयोग करके की गई विद्युत निर्मिती पर्यावरण के लिए घातक सिद्ध हो सकती हैं। इन ऊर्जास्रोतों का उपयोग करने पर पर्यावरण पर इसका प्रभाव पड़ता है।
- जीवाश्म ईंधन के ज्वलन से हवा प्रदूषित होती है। ईंधनों के अपूर्ण दहन से कार्बन मोनोआक्साइड जैसी विषैली गैस उत्पन्न होती है। हमारे स्वास्थ्य के लिए कार्बन मोनोआक्साइड गैस हानिकारक है। इसके अतिरिक्त ज्वलन से उत्पन्न होने वाले अन्य विषैली गैसें तथा हवा में स्थित प्रदूषकों के ठोस कण श्वसन संस्थान के अनेक रोगों को जन्म देते हैं। इसी प्रकार ईंधन के ज्वलन से निर्मित कार्बन डाइआक्साइड के कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि होती है तथा नाइट्रोजन डाइआक्साइड के कारण अम्लीय वर्षा होती है। इस सभी प्रक्रियाओं के कारण पर्यावरण को क्षति पहुँचती है।
- जीवाश्म ईंधनों का भंडार सीमित है। तथा जीवाश्म ईंधन का निर्माण होने में लाखों वर्षों का समय लगता है। जीवाश्म ईंधन के अनुसंधान और उत्खनन से पर्यावरण को क्षति पहुँचती है। इसी प्रकार सागर में होने वाले उत्खनन से भी पर्यावरण प्रभावित होता है।
- परमाणु ऊर्जा पर आधारित विद्युत ऊर्जा निर्मिती केन्द्र से उत्पन्न होने वाले परमाण्विक कचरे का निष्कासन एक जटिल समस्या बना हुआ है। इसी प्रकार परमाणु ऊर्जा केन्द्र में कोई बड़ी दुर्घटना होने से बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान होता है। मानव की बढ़ती हुई ऊर्जा आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए पर्यावरण स्नेही ऊर्जा निर्माण की विभिन्न पद्धतियों का अनुसंधान शुरू हो चुका है।
जलसंचयन से विद्युत निर्मिती, पवन ऊर्जा से विद्युत निर्मिती, सौर ऊर्जा से विद्युत निर्मिती, जैविक ईंधनों से विद्युत निर्मिती इत्यादि प्रक्रियाओं से विद्युत निर्मिती हो सकती है। यह सभी प्रक्रियाएँ पर्यावरण स्नेही है। अत: इसे पर्यावरण को क्षति नहीं पहुँचती है।
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विद्युत-निर्मिती प्रक्रिया व पर्यावरण
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