Advertisements
Advertisements
Question
उस सिद्धांत का वर्णन कीजिए, जो परमाणु की त्रिज्या से संबंधित होता है- जब वह इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है।
Answer in Brief
Solution
जब परमाणु एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों का त्याग करता है, तब धनायन बनता है। इस प्रकार प्राप्त धनायन सदैव अपने जनक परमाणु से आकार में छोटा होता है। ऐसा निम्नलिखित कारणों से हो सकता है-
- संयोजी कोश के विलोपन द्वारा (By elimination of valence shell) - कुछ स्थितियों में, इलेक्ट्रॉन त्यागने पर संयोजी कोश को पूर्णतया विलोपन हो जाता है। बाह्यतम कोश विलुप्त होने के कारण धनायन के आकार में कमी आ जाती है।
- प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि के द्वारा (By increase in effective nuclear charge) - धनायन में, इलेक्ट्रॉनों की संख्या जनक परमाणु से कम होती है। कुल नाभिकीय आवेश समान रहता है। यह प्रभावी नाभिकीय आवेश को बढ़ा देता है। परिणामस्वरूप, इलेक्ट्रॉन नाभिक से अधिक दृढ़ता से जुड़े रहते हैं जिससे इनके आकार में कमी आ जाती है।
shaalaa.com
तत्वों के गुणधर्मों में आवर्तिता - भौतिक गुणधर्म - परमाणु त्रिज्या
Is there an error in this question or solution?
Chapter 3: तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता - अभ्यास [Page 96]
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
‘परमाणु त्रिज्या’ और ‘आयनी त्रिज्या’ से आप क्या समझते हैं?
किसी वर्ग या आवर्त में परमाणु त्रिज्या किस प्रकार परिवर्तित होती है? इस परिवर्तन की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?
धनायन अपने जनक परमाणुओं से छोटे क्यों होते हैं और ऋणायनों की त्रिज्या उनके जनक परमाणुओं की त्रिज्या से अधिक क्यों होती है? व्याख्या कीजिए।
उस सिद्धांत का वर्णन कीजिए, जो परमाणु की त्रिज्या से संबंधित होता है- जब वह इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है।