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Question
वैश्वीकरण की आर्थिक परिणतियाँ क्या हुई है? इस संदर्भ में वैश्वीकरण ने भारत पर कैसे प्रभाव डाला है?
Long Answer
Solution
वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभाव - वैश्वीकरण देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को आर्थिक क्षेत्र में भी प्रभावित किया है। इसे के अच्छे प्रभाव भी पड़े हैं और बुरे भी। सकारात्मक आर्थिक प्रभाव वैश्वीकरण के अच्छे आर्थिक प्रभाव निम्नलिखित हैं
- वैश्वीकरण से विभिन्न देशों के बीच आर्थिक प्रभाह तेज हुआ है इस आर्थिक प्रभाह की तेजी में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं का भी हाथ है इससे देशों के आर्थिक विकास में सहायता मिलती है।
- वैश्वीकरण के कारण वस्तुओं तथा सेवाओं के प्रवाह में भी वृद्धि हुई है जिससे देशों में व्यापारिक गतिविधियां तेज भी हुई है अधिक भी हुई है और इससे आर्थिक विकास को गति मिलती है।
- पूँजी के प्रवाह के कारण विकासशील देशों के लोग विकासशील देशों में अपनी पूंजी का निवेश करने लगे हैं ताकि उससे अधिक व्याज मिल सके। इससे विकासशील देशों की आर्थिक विकास की वृद्धि होती है और उन्हें अपने सामाजिक आर्थिक विकास हेतु विदेशी पूंजी प्राप्त हो जाती है।
- वैश्वीकरण में क्योंकि समान व्यापारिक तथा श्रम नियम आपनाए जाने की व्यवस्था की जा रही है, इससे आशा की जाती है कि सभी देशों का संतुलित आर्थिक विकास होगा।
वैश्वीकरण के नकारात्मक आर्थिक प्रभाव - वैश्वीकरण के नकारात्मक आर्थिक परिणाम भी है प्रमुख आर्थिक नकारात्मक प्रभाव निम्नलिखित हैं।
- वैश्वीकरण ने सभी देशों में पूंजीवादी व्यवस्था को बढ़ावा दिया है और बाजार मुल्क का अर्थ व्यवस्था अपनाई गई है इससे अमीरों की संख्या कम और गरीबों की संख्या अधिक होती जा रही है। अर्थात अमीर और अधिक अमीर तथा गरीब और अधिक गरीब होते जा रहे हैं।
- वैश्वीकरण के अंतर्गत राज्य समाज कल्याण सामाजिक न्याय तथा सामाजिक सुरक्षा से संबंधित गतिविधियों से भी हाथ खींच लिया है इससे सरकारी सहायता तथा संरक्षण पर आश्रित रहने वाले लोगों की दशा और अधिक शोचनीय होती जा रही है।
- अंतरराष्ट्रीय वित्त संस्थाएं ऐसे तौर-तरीके प्रयोग करती है जिनसे विकसित देशों के आर्थिक हितों को बढ़ावा मिले उनकी सुरक्षा हो गरीब देशों के आर्थिक हितों की अनदेखी की जा रही है जिसके कारण विकासशील देशों में वैश्वीकरण के प्रति विरोध बढा है और इन देशों में तनाव की स्थिति बढ़ती जा रही हैं।
- बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने गरीब तथा तीसरी दुनिया के देशों के काम धंधों पर चोट की है और छोटे - छोटे व्यापारी इन बड़ी कंपनियों का मुकाबला न कर सकने के कारण बेरोजगार होते जा रहे हैं। वैश्वीकरण का भारत पर प्रभाव - 1991 में वित्तीय संकट से उबरने और आर्थिक वृद्धि की ऊंची दर हासिल करने की इच्छा से भारत में आर्थिक सुधारों की योजना शुरू की गई इस योजना के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों पर आयद बाधाएँ हटाई गई। इन क्षेत्रों में व्यापार और विदेशी निवेश भी शामिल थे। यह कहना जल्दबाजी होगी की भारत के लिए यह सब कितना अच्छा साबित हुआ है क्योकि अंतिम कसौटी ऊँची वृद्धि - दर नहीं बल्कि इस बात को सुनिश्चित करना है की आर्थिक बढ़वार के फायदों में सबका साझा हो ताकि हर कोई खुशहाल बनें।
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आर्थिक प्रभाव
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