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"वहीं सुख, शांति और सुकून है, जहाँ अखंडित संपूर्णता है। पेड़, पौधे, पशु और आदमी सब अपनी-अपनी लय, ताल और गति में हैं। - Hindi Course - A

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Question

"वहीं सुख, शांति और सुकून है, जहाँ अखंडित संपूर्णता है। पेड़, पौधे, पशु और आदमी सब अपनी-अपनी लय, ताल और गति में हैं। हमारी पीढ़ी ने प्रकृति की इस लय, ताल और गति से खिलवाड़ कर अक्षम्य अपराध किया है।" 'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ के आधार पर बताइए कि इस अक्षम्य अपराध का प्रायश्चित मनुष्य किस प्रकार कर सकता है?

Answer in Brief

Solution

हमारी पीढ़ी ने प्रकृति का अंधाधुंध तरीके से दोहन किया है। उसने प्रदूषण व वृक्षों के कटाव से पर्यावरणीय संतुलन बिगाड़ा है। इससे प्रकृति की लय, ताल और गति बिगड़ी है, जिसके भयावह परिणाम सामने आ रहे हैं। मनुष्य को प्रकृति व पर्यावरण की कराह सुनकर उनके अनुकूल व्यवहार करना चाहिए। पर्यटन स्थलों पर 'प्रकृति मित्र' बनकर प्लास्टिक, पॉलीथिन आदि नहीं फेंकने चाहिए। "प्रकृति व पर्यावरण मित्र' की भूमिका संकल्पित होकर निभानी चाहिए।

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साना-साना हाथ जोड़ि...
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2022-2023 (March) Sample

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