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विचार मंथन: कृतज्ञ बनो, कृतघ्न नहीं। - English (Second/Third Language)

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Question

विचार मंथन:

कृतज्ञ बनो, कृतघ्न नहीं।

Short Answer

Solution

यह विचार हमें आभार और कृतज्ञता की भावना का महत्व सिखाता है। इसका अर्थ है कि हमें उन सभी लोगों और परिस्थितियों के प्रति आभारी रहना चाहिए जिन्होंने हमारे जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। कृतज्ञ व्यक्ति हमेशा दूसरों की मदद को याद रखते हैं और उनका सम्मान करते हैं, जबकि कृतघ्न व्यक्ति एहसान भूल जाता है और दूसरों के योगदान को महत्व नहीं देता।

  1. प्रेरणा:
    1. हमें अपने माता-पिता, शिक्षक और दोस्तों के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए क्योंकि वे हमें बेहतर इंसान बनाते हैं।

    2. प्रकृति और समाज से जो हमें मिलता है, उसका आदर करना चाहिए।

  2. आचरण:
    1. धन्यवाद और आभार व्यक्त करना हमारी आदत होनी चाहिए।
    2. मदद करने वालों के प्रति सम्मान और प्रेम का भाव रखना चाहिए।
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Chapter 1.3: मुक्ति का प्रतिदान - अंतःपाठ प्रश्न [Page 7]

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Balbharati Integrated 7 Standard Part 1 [Hindi Medium] Maharashtra State Board
Chapter 1.3 मुक्ति का प्रतिदान
अंतःपाठ प्रश्न | Q १. | Page 7
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