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विद्यापति और जायसी प्रेम के कवि हैं। दोनों की तुलना कीजिए। - Hindi (Elective)

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Question

विद्यापति और जायसी प्रेम के कवि हैं। दोनों की तुलना कीजिए।

Long Answer

Solution

विद्यापति और जायसी दोनों ही प्रेम के कवि माने जाते हैं। दोनों ने अपनी रचनाओं में प्रेम की बहुत सुंदर अभिव्यक्ति की है। दोनों ने ही वियोग को अपनी रचनाओं का आधार बनाया है। दोनों ने ही वियोग तथा उससे उत्पन्न दुख का मार्मिक चित्रण किया है। जहाँ नायिकाएँ अपने प्रेम को पाने के लिए आतुर हैं। प्रेमी की अनुपस्थिति उसे दारूण दुख दिए जा रही है। परन्तु जहाँ जायसी ने प्रेम के आलौलिक रूप को अपनी रचनाओं का आधार बनाया है, वहीं दूसरी ओर विद्यापति ने लौलिक प्रेम को अपनी रचनाओं का आधार बनाया है। जायसी ने लोककथा को माध्यम बनाकर प्रेम की अभिव्यक्ति की है, तो विद्यापति ने भगवान श्रीकृष्ण तथा राधा को माध्यम बनाकर प्रेम की अभिव्यक्ति की है।
जैसे पहाड़ों पर बर्फ जमती है। वह पिघलकर नदी का रूप धारण कर लेती है और अंततः सागर में जाकर मिल जाती है। सागर का जल वाष्पित होकर बादलों का रूप धारण कर लेता है तथा वह बर्फ व वर्षा के रूप में फिर से नदी में जा मिलता है। इस तरह यह क्रम चलता रहता है और प्रकृति एक सुंदर संतुलन बनाए रखती है। परन्तु मनुष्य ने प्रकृति के संतुलन में हस्तक्षेप कर असंतुलन की स्थिति बना दी है। प्रकृति में यदि असंतुलन पैदा होता है, तो असमय बाढ़, सूखा तथा प्रलय की स्थिति आ बनती है। वनों के काटे जाने से पर्यावरण में प्रदूषण की मात्रा बढ़ गई है। जहरीली गैसों ने पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचाना आरंभ कर दिया है। इससे भंयकर स्थितियाँ पैदा हो सकती है। अतः हमें चाहिए कि प्रकृति का दोहन करने के स्थान पर उसका पोषण करे तभी हम स्वयं के लिए सुरक्षित कल बना पाएँगे। प्रकृति का महत्व हम भुला नहीं सकते हैं। इसके बिना हम अपनी कल्पना नहीं कर सकते हैं।
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विद्यापति
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Chapter 1.09: विद्यापति (पद) - प्रश्न-अभ्यास [Page 59]

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NCERT Hindi - Antara Class 12
Chapter 1.09 विद्यापति (पद)
प्रश्न-अभ्यास | Q 3. | Page 59
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