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'विप्लव गान' कविता के प्रथम चरण का भावार्थ लिखिए। कवि, कुछ ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल-पुथल मच जाए,एक हिलोर इधर से आए, एक हिलोर उधर से आए,प्राणों के लाले पड़ जाएँ, - Hindi [हिंदी]

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Question

'विप्लव गान' कविता के प्रथम चरण का भावार्थ लिखिए।

कवि, कुछ ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल-पुथल मच जाए,
एक हिलोर इधर से आए, एक हिलोर उधर से आए,
प्राणों के लाले पड़ जाएँ, त्राहि-त्राहि रव नभ में छाए,
नाश और सत्‍यानाशों का... धुआँधार जग में छा जाए,
बरसे आग, जलद जल जाएँ, भस्‍मसात भूधर हो जाएँ,
पाप-पुण्य सदसद भावों की, धूल उड़ उठे दायें-बायें,
नभ का वक्षस्‍थल फट जाए, तारे टूक-टूक हो जाएँ
कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल-पुथल मच जाए।
Answer in Brief

Solution

कविता में कवि से अनुरोध किया जा रहा है कि वह कोई ऐसी तान सुनाए जिससे हर तरफ उथल पुथल मच जाए, जिससे सब जगह हलचल हो जाए। उथल पुथल इतनी तेज हो कि एक तरफ से एक झोंका आये तो दूसरी तरफ से दूसरा झोंका। उन भयंकर प्रलयंकारी विद्रोह की लहरों से अपने प्राण बचाने ही मुश्किल हो जाए। हाहाकार का स्वर आकाश में गूँज उठे। क्रांति सदैव बुराईयों का केवल नाश ही नहीं करती है, बल्कि उन्हें मूल से ही विनाश कर देती हैं। इसी कारण निर्भर भारत में अत्याचारों को जलाकर कवि उसके धुएं से विश्व को भर देना चाहता है। आकाश क्रांति की आग उगले। उस आग में धरती को धारण करने वाला शेषनाग ही जल कर राख हो जाए। पाप, पुण्य तथा अच्छे और बुरे भावों पर विचार करने का समय ही न रहे। तारे जो आकाश में चुपचाप चमकते रहते हैं, वे भी टूटकर बिखर जाएँ। कवि ऐसे गीत का आहवान कर रहा है जिससे भारतवासियों पर ही नहीं, बल्कि प्रकृति पर भी प्रभाव पड़े और वह भी अत्याचारों का अंत करने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाए।

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विप्लव गान
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Chapter 2.13: विप्लव गान - स्वाध्याय [Page 114]

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Balbharati Hindi - Kumarbharati 9 Standard Maharashtra State Board
Chapter 2.13 विप्लव गान
स्वाध्याय | Q (२) | Page 114
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