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'वसंत आया' कविता में कवि की चिंता क्या है? उसका प्रतिपाद्य लिखिए? - Hindi (Elective)

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Question

'वसंत आया' कविता में कवि की चिंता क्या है? उसका प्रतिपाद्य लिखिए?

Answer in Brief

Solution

आज के मनुष्य का प्रकृति से संबंध टूट गया है। उसने प्रगति और विकास के नाम पर प्रकृति को इतना नुकसान पहुँचाया है कि अब प्रकृति का सानिध्य सपनों की बात लगती है। महानगरों में तो प्रकृति के दर्शन ही नहीं होते हैं। चारों ओर इमारतों का साम्राज्य है। ऋतुओं का सौंदर्य तथा उसमें हो रहे बदलावों से मनुष्य परिचित ही नहीं है। कवि के लिए यही चिंता का विषय है। प्रकृति जो कभी उसकी सहचरी थी, आज वह उससे कोसों दूर चला गया है। मनुष्य के पास अत्यानुधिक सुख-सुविधाओं युक्त साधन हैं परन्तु प्रकृति के सौंदर्य को देखने और उसे महसूस करने की संवेदना ही शेष नहीं बची है। उसे कार्यालय में मिले अवकाश से पता चलता है कि आमुक त्योहार किस ऋतु के कारण है। अपने आसपास हो रहे परिवर्तन उसे अवगत तो कराते हैं परन्तु वह मनुष्य के हृदय को आनंदित नहीं कर पाते हैं। मनुष्य और प्रकृति का प्रेमिल संबंध आधुनिकता की भेंट चढ़ चुका है। आने वाला भविष्य इससे भी भयानक हो सकता है।

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वसंत आया
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Chapter 1.06: रघुवीर सहाय (वसंत आया, तोड़ो) - प्रश्न-अभ्यास [Page 39]

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NCERT Hindi - Antara Class 12
Chapter 1.06 रघुवीर सहाय (वसंत आया, तोड़ो)
प्रश्न-अभ्यास | Q 6. | Page 39
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