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वस्तु विनिमय प्रणाली क्या है? इसकी क्या कमियाँ हैं? - Economics (अर्थशास्त्र)

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Question

वस्तु विनिमय प्रणाली क्या है? इसकी क्या कमियाँ हैं?

Long Answer

Solution

जब एक वस्तु का विनिमय प्रत्यक्ष रूप में दूसरी वस्तु से होता है तो उसे वस्तु विनिमय कहा जाता है। अन्य शब्दों में, वस्तु विनिमय प्रणाली उस प्रणाली को कहा जाता है जिसमें वस्तु का लेन-देन वस्तु से किया जाता है।

  • वस्तु विनिमय प्रणाली की निम्नलिखित कमियाँ हैं
  1. आवश्यकताओं के दोहरे संयोग का अभाव-वस्तु विनिमय के लिए आवश्यक है कि एक व्यक्ति की आवश्यकता की वस्तु दूसरे व्यक्ति के पास हो और जो वस्तु दूसरा व्यक्ति चाहता है, वह पहले के पास हो। दूसरे शब्दों में, पहले व्यक्ति की वस्तु की पूर्ति, दूसरे की माँग की वस्तु हो और दूसरे व्यक्ति की। पूर्ति की वस्तु, पहले व्यक्ति के माँग की वस्तु हो। जब तक आवश्यकताओं को इस प्रकार का दोहरा संयोग नहीं होता, वस्तु की लेन-देन नहीं हो सकती। उदाहरण के लिए यदि किसी के पास जूता है, परन्तु वह उसके बदले में गेहूँ तैयार नहीं तो विनिमय संभव नहीं है।
  2. सामान्य लेखा इकाई का अभाव-वस्तु विनिमय प्रणाली में भिन्न-भिन्न वस्तुओं का मूल्य जानने के लिए और तुलना करने के लिए कोई सर्वमान्य मापक नहीं है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति गेहूँ का
    लेन-देन करना चाहता है तो उसे गेहूं का मूल्य कपड़े के रूप में (1 किलो गेहूँ = 1 मीटर कपड़ा), दूध के रूप में (1 किलो गेहूँ = 2 लीटर दूध) आदि बाजार में उपलब्ध हर वस्तु के रूप में पता होना चाहिए।
    यह अत्यन्त कठिन कार्य है।
  3. स्थगित भुगतान के मानक का अभाव-वस्तु विनिमय व्यवस्था में वस्तुओं का भविष्य में भुगतान करने में कठिनाई होती है। इस प्रणाली में ऐसी कोई इकाई नहीं होती जिसे स्थगित/भविष्य भुगतान के मानक के रूप में प्रयोग कर सकें। वस्तुओं के रूप में भावी भुगतानों का वस्तुओं के रूप में भुगतान किया जाए तो इसमें कई कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं। जैसे भविष्य में दी जानेवाली वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर विवाद, भविष्य में भुगतान की वस्तु पर असहमति, अनुबंध की अवधि के दौरान वस्तु के अपने मूल्यमान में उतार-चढ़ाव का जोखिम जिससे एक को लाभ तथा दूसरे को हानि होने की संभावना रहती है। उदाहरण के लिए कीमत X ने 10 वर्ष के लिए अपना रथ श्रीमान Y को दिया। 10 वर्ष बाद वह वही रथ नहीं लौटा सकता, क्योंकि वे पुराने हो गए। यदि वह नया रथ लौटाता है तो गुणवत्ता पहले वाले रथ
    से अधिक भी हो सकती है और कम भी।
  4. मूल्य संचय का अभाव-यहाँ मूल्य को संचय वस्तुओं के रूप में हो सकता है, परन्तु मूल्य को वस्तुओं के रूप में संचित करने में निम्नलिखित कठिनाइयाँ हैं|
    a. मूल्य को वस्तुओं के रूप में संचित करने में अधिक स्थान की आवश्यकता पड़ती है।
    b. वस्तुएँ नाशवान होती हैं।
    c. वस्तुओं के मूल्य में अंतर आ जाता है।
    d. वस्तुओं को रखे हुए भी मूल्यहास होता है। उदाहरण के लिए यदि एक व्यक्ति अपनी बेटी के विवाह के लिए मूल्य का संचय करना चाहता है तो वह क्या संचय करेगा? क्या वह बारातियों का भोजन
    बनवाकर रख देगा? क्या वह फर्नीचर खरीदकर रख देगा?
  5. अन्य कठिनाइयाँ-
    a. वस्तु विनिमय में ऐसी वस्तुओं के लेन-देन में बहुत कठिनाई आती है जिसका
    विभाजन और उपविभाजन नहीं हो सकता। मान लो 1 बैल = 100 किलो गेहूँ परन्तु बैल का मालिक केवल 50 किलो गेहूं खरीदना चाहता है तो वह आधा बैल नहीं दे सकता।
    b. वस्तु विनिमय प्रणाली के अन्तर्गत यदि कोई व्यक्ति एक स्थान को छोड़कर दूसरे स्थान पर जाना चाहता है तो वह अपने धन को दूसरे स्थान पर ले जाने में असमर्थ हो सकता है। जैसे कोई अपने खेत एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं ले जा सकता।
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मुद्रा के कार्य
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Chapter 3: मुद्रा और बैंकिंग - अभ्यास [Page 53]

APPEARS IN

NCERT Economics - Introductory Macroeconomics [English] Class 12
Chapter 3 मुद्रा और बैंकिंग
अभ्यास | Q 1. | Page 53
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